
भोपाल। भगवान बुद्ध के परम शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के अस्थि अवशेषों को गुरुवार को राजा भोज एयरपोर्ट पर राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया रवाना किया गया। इस अवसर पर पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आज का दिन भारत और मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन करने से वैश्विक पहचान मिलेगी।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि पावन अस्थि अवशेष न केवल हमारी अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर हैं, बल्कि वैश्विक शांति और सौहार्द के प्रतीक भी हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के इन महान शिष्यों की पवित्र अस्थियां संपूर्ण विश्व में महज तीन देशों- भारत, श्रीलंका और म्यांमार में ही संरक्षित हैं। हमारे प्रदेश और देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है। इससे मंगोलिया सहित सभी देशों के बौद्ध अनुयायी प्रदेश में आने के लिए प्रेरित होंगे।
पीएम नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सांस्कृतिक नीतियों की सराहना की
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सांस्कृतिक नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार जन-जन की आस्था और देश के आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मंत्री ने पूर्व में इन अवशेषों की सफल थाईलैंड यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न देशों के साथ हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध अत्यंत प्राचीन और प्रगाढ़ हैं। यह यात्रा इन संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
सांची आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना: बानगल उपतिस्स नायक थेरी
बौद्ध धर्मगुरु बड़े गुरु पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने कहा कि सांची केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वैभव का एक अनमोल खजाना है। बौद्ध जगत में इस स्थान की महिमा अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि जब ये पवित्र अस्थि अवशेष पूर्व में थाईलैंड प्रवास पर गए थे, तब वहां लगभग 5.5 मिलियन (55 लाख) से अधिक श्रद्धालुओं ने इनकी पूजा-अर्चना की थी। बौद्ध परंपरा में इन अवशेषों का स्थान सर्वोपरि है।
भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व की एक अमूल्य निधि : प्रियंक मिश्रा
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व की एक अमूल्य निधि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मूल मंत्र 'विकास भी, विरासत भी' का उल्लेख किया और कहा कि प्रशासन इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय और आध्यात्मिक प्रकल्प संपूर्ण विश्व को यह दिग्दर्शित करते हैं कि भारत आदि काल से विश्वगुरु रहा है। अपनी इसी सांस्कृतिक संपन्नता के कारण सदैव विश्वगुरु के पद पर सुशोभित रहेगा।
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