
उज्जैन। धर्म, भक्ति और सुरों की मिठास… कुछ ऐसा ही नज़ारा आज शाम से उज्जैन में देखने को मिलेगा। महाकाल की नगरी में जब शंकर महादेवन की आवाज गूंजेगी और हजारों भक्त “हर हर महादेव” के जयकारे लगाएंगे, तो माहौल खुद-ब-खुद भक्तिरस में डूब जाएगा। ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर परिसर में आज से श्रीमहाकाल महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हो रहा है, जो 18 जनवरी तक चलेगा। इस भव्य आयोजन की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे।
2100 साल पुरानी परंपरा को फिर से जिंदा करने की पहल
साहित्यिक प्रमाण बताते हैं कि उज्जैन के न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य करीब 2100 साल पहले महाकाल वन में शिव महोत्सव का आयोजन करवाया करते थे। समय के साथ यह परंपरा इतिहास के पन्नों में सिमट गई, लेकिन अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा से एक बार फिर उसी गौरवशाली विरासत को नया जीवन दिया जा रहा है। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर वीर भारत न्यास और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति मिलकर इस आयोजन को भव्य रूप दे रहे हैं, ताकि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान देश-दुनिया तक पहुंचे।
शंकर महादेवन का लाइव शो, साथ होंगे सिद्धार्थ और शिवम
महोत्सव की ओपनिंग सेरेमनी खास होने वाली है। बॉलीवुड और इंडियन फ्यूज़न म्यूज़िक के मशहूर गायक शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम के साथ मंच साझा करेंगे। भक्ति, सूफी और शास्त्रीय संगीत का ऐसा संगम कम ही देखने को मिलता है। आयोजकों के मुताबिक, इस विशेष प्रस्तुति में शिव भक्ति से जुड़े कई प्रसिद्ध भजन और गीत पेश किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठेंगे।
आध्यात्म, लोक कला और जनजातीय संस्कृति का महाकुंभ
श्रीमहाकाल महोत्सव केवल संगीत तक सीमित नहीं रहेगा। यह उत्सव आध्यात्म, लोक परंपरा और जनजातीय संस्कृति का अद्भुत संगम बनेगा।
महोत्सव के हर दिन अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे—
शास्त्रीय संगीत की संध्या
लोक नृत्य और जनजातीय नाट्य प्रस्तुतियां
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें
रंग-बिरंगी वेशभूषा में कलाकारों की झलक
खास बात यह है कि प्रतिदिन जनजातीय कला यात्रा अलग-अलग क्षेत्रों से निकलकर श्रीमहाकाल महालोक परिसर पहुंचेगी। इसमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए भक्तों और पर्यटकों को संस्कृति की जड़ों से जोड़ेंगे।
इंडोनेशिया और श्रीलंका के कलाकार बढ़ाएंगे अंतरराष्ट्रीय रंग
इस बार महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की भी तैयारी है। आयोजकों ने इंडोनेशिया और श्रीलंका के नाट्य दलों को आमंत्रित किया है, जो अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से भारतीय दर्शकों को रूबरू कराएंगे। इन देशों की शिव परंपरा और रामायण से जुड़ी लोक कथाएं भारतीय संस्कृति से गहरे तौर पर जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यह सांस्कृतिक संवाद भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के रिश्तों को और मजबूत करेगा।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा बढ़ावा
श्रीमहाकाल महोत्सव से उज्जैन में पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी सेवा और हस्तशिल्प बाजार में पहले से ही चहल-पहल देखने को मिल रही है। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग का मानना है कि इस आयोजन से न केवल उज्जैन बल्कि पूरे मालवा अंचल की ब्रांडिंग होगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर खास ध्यान
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और महालोक क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष रूट प्लान भी तैयार किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
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