
देवास। मध्यप्रदेश के देवास जिले में वन्यजीवों की मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। खातेगांव तहसील के विक्रमपुर-सागोनिया जंगल में एक पहाड़ी पर नर तेंदुए का पुराना कंकाल मिलने से वन विभाग में हलचल मच गई है। शुरुआती जांच में तेंदुए की मौत भूख से होने की आशंका जताई जा रही है।
किसान को बदबू से मिला सुराग, जंगल में पहुंचा वन अमला
घटना तब सामने आई जब एक स्थानीय किसान अपने खेत में बंदरों को भगाने गया था। इसी दौरान आसपास से तेज बदबू आने पर उसने पहाड़ी क्षेत्र में जाकर देखा, जहां तेंदुए का कंकाल पड़ा मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग और वन विकास निगम की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक यह कंकाल वन विकास निगम के कक्ष क्रमांक-260 में मिला, जिसके बाद वरिष्ठ अफसरों और डॉग स्क्वाड को भी बुलाया गया।
करीब 14 साल का था तेंदुआ, शिकार न कर पाने की आशंका
पशु चिकित्सक की शुरुआती जांच में सामने आया कि मृत तेंदुआ नर था और उसकी उम्र लगभग 14 साल के आसपास थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक उम्र होने के कारण वह शिकार करने में कमजोर हो गया होगा, जिससे लंबे समय तक भोजन न मिलने पर उसकी मौत हुई हो सकती है। हालांकि वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा। शव के सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेज दिए गए हैं और उच्च अधिकारियों को भी जानकारी दे दी गई है।
विक्रमपुर-सागोनिया जंगल: तेंदुओं की लगातार गतिविधि
देवास जिले का यह जंगल लंबे समय से तेंदुओं की आवाजाही के लिए जाना जाता है। आसपास के गांवों में अक्सर वन्यजीवों के दिखने की खबरें आती रहती हैं। हाल ही में एक किसान पर तेंदुए के हमले की घटना भी सामने आई थी, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, मई और जुलाई 2025 में भी जिले में तेंदुओं की मौत के मामले सामने आए थे, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
वन विभाग की अगली कार्रवाई क्या होगी?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की असली वजह साफ होगी।
उज्जैन सर्कल के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जंगल में तेंदुओं की निगरानी बढ़ाने और भोजन स्रोतों पर भी अध्ययन किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में प्राकृतिक शिकार की कमी और बढ़ती उम्र जैसे कारण कई बार बड़े मांसाहारी जानवरों के लिए चुनौती बन जाते हैं।
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