
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में कृषि मंथन कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेती को लाभकारी बनाने के लिए संकल्पित भाव के साथ आगे बढ़ रही है। प्रदेश में किसानों को हम केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बेहतर मार्केट लिकेंजेस से भी सशक्त बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश में कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसायों को सह अस्तित्व की दृष्टि से बड़े सम्मान के साथ देखा गया है। समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश की थीम के साथ पूरे वर्ष प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि मंथन कार्यशाला किसानों के अनुभव, विज्ञान के नवाचार, सरकार की नीतियों और बाजार की संभावनाओं को एक सूत्र में पिरोने का सशक्त प्रयास है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गौमाता का पूजन कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने उन्नत बीज प्रसंस्करण, औषधीय पौध प्रजाति, खाद्य प्रसंस्करण एवं उन्नत कृषि फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री का जनजातीय समुदाय के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य एवं वाद्य यंत्रों से स्वागत किया।
23.21 करोड़ की लागत के विभिन्न कार्यों का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में 23 करोड़ 21 लाख की लागत के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें प्रमुख रूप से 13 करोड़ रुपए की लागत से बने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के नवीन प्रशासनिक भवन, 1.11 करोड़ रुपए लागत के बोहानी गन्ना अनुसंधान केन्द्र के प्रशासनिक भवन, 1 करोड़ रुपए लागत के बालाघाट जिले के कृषि महाविद्यालय वारासिवनी के कौशल विकास केन्द्र के साथ ही जबलपुर में 1.26 करोड़ रुपए से बने स्वचालित तरल जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र का लोकार्पण किया। साथ ही किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की 4 करोड़ 92 लाख रूपये से निर्मित 4 इकाइयों का भी लोकार्पण किया गया, इसमें रीवा एवं शहडोल के ज्ञान प्रसार केन्द्र शामिल है।
10 स्टार्ट-अप्स को 10 करोड़ रुपए से अधिक के स्वीकृति आदेश का वितरण किया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यशाला में केंद्र सरकार की ओर से वित्त पोषित 10 स्टार्ट-अप्स को 10 करोड़ रुपए से अधिक के स्वीकृति आदेश का वितरण किया। साथ ही कृषक अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने को लेकर पीपीवी, एफआर ऑथॉरिटी नई दिल्ली की ओर से प्रदत्त प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय को प्रदान किया। उन्होंने कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करने के साथ ही विभिन्न विभागों के द्वारा संचालित योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया।
गेहूं, सोयाबीन और चना सहित अनेक नई फसलों की किस्में तैयार
कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कृषि मंथन कार्यशाला में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक, कृषि स्टार्ट-अप, एफपीओ एवं किसान बंधु शामिल हुए हैं। यह मंच कृषि के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाई प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश अनेक कृषि फसलों में देश में नंबर-1 है। कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए गेहूं, सोयाबीन और चना सहित अनेक नई फसलों की किस्में तैयार की हैं। विश्वविद्यालय ने बालाघाट के चिन्नौर चावल और रीवा के सुंदरजा आम के लिए जीआई टैग प्राप्त किए हैं।
कार्यक्रम में इनकी उपस्थिति रही
कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अजय विश्नोई, अशोक ईश्वरदास रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष वरकड़े, जनप्रतिनिधि, सचिव कृषि निशांत वरवड़े, कमिश्नर धनंजय सिंह और कलेक्टर राघवेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित रहे।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

