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नॉन फिल्मी लोगों का स्ट्रगल कभी खत्म नहीं होता - पूजा चोपड़ा - पूजा चोपड़ा

08 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
नॉन फिल्मी लोगों का स्ट्रगल कभी खत्म नहीं होता - पूजा चोपड़ा - पूजा चोपड़ा
Deepak Singh
डेस्क रिपोर्टर
Deepak Singh

भोपाल। नॉन फिल्मी लोगों के लिए स्ट्रगल कभी खत्म ही नहीं होता। हम भले ही 2-4 हिट फिल्में भी दे दें तब भी ये स्ट्रगल चलता ही रहता है और अगर वहीं आपकी 1-2 फिल्में अगर अच्छी नहीं चली तो लोग आपको फिर से एक विशेष कैटेगरी में देखने लग जाते हैं लेकिन हम नॉन फिल्मी लोगों में एक दृढ़ता रहती है कि फिर से उठकर खड़े हो सकते हैं। हमारे अंदर वो क्षमता है जिसके बल पर यहां तक पहुंचे हैं इसलिए अगर 1-2 फिल्में नहीं भी चलती तो हम डिसाइड करते हैं कि एक फिर से कोशिश करेंगे। हम लोग गिरकर भी बहुत जल्दी उठ जाते हैं क्योंकि हमें हार मानना नहीं आता। यह कहना है ‘कमांडो’ ‘अय्यारी’ ‘बबलू बैचलर’ ‘जहां चार यार’ ‘फैशन’ और ‘हीरोइन’ फिल्म में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीतने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस और फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2009 पूजा चोपड़ा का।वह भोपाल में एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने ‘न्यूज वर्ल्ड’ से खास बातचीत में अपने अभिनय का सफर साझा किया।


कमांडो’ में रील लाइफ में रियल लाइफ़ को जिया


‘विद्युत जामवाल’ के साथ ‘कमांडो’ फिल्म में मेरा निभाया हुआ सिमरन का किरदार मेरी रियल लाइफ़ पर्सनालिटी के बहुत करीब है। जैसा उसमें दिखाया था इंडिपेंडेंट,स्ट्रॉन्ग, बबली और मस्तीखोर,मैं भी ऐसी ही हूं। सब मुझसे कहते हैं कि कमांडो फिल्म में आपने कितनी अच्छी एक्टिंग करी थी तो मैं अपने आपसे कहती हूं कि एक्टिंग तो थी ही नहीं वो,क्योंकि मैने रील लाइफ में रियल लाइफ़ को ही जिया था।दरअसल एक्टिंग मैने मनोज वाजपई के साथ ‘आउच’ फिल्म में की थी। मुझे लगता है उसमें मेरी आज तक की बेस्ट परफॉर्मेंस है। मेरे उस किरदार में बहुत से शेड्स देखने को मिलते हैं ।वो रोल मेरी कंफर्ट जोन से बाहर था और मेरे लिए सच में बहुत ही चैलेंजिंग था।


साउथ इंडस्ट्री में बॉलीवुड से बहुत ज्यादा है मेहनत


ये बात सही है कि साउथ इंडस्ट्री में बॉलीवुड से बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है क्योंकि वो भाषा ही समझ नहीं आती तो पहले अपने डायलॉग्स को याद करो और फिर तुम्हे अपने इमोशंस और एक्सप्रेशन भी रखने पड़ते हैं आपका जब आपको भाषा ही नही आती तो आपका दिमाग इमोशंस से कनेक्ट नहीं कर पाता। इसलिए न केवल आपको अपनी लाइन याद रखनी पड़ती है बल्कि ये भी याद रखना पड़ता है कि किस लाइन के साथ कौन सा इमोशन जुड़ा हुआ है और ये सब करना आसान नहीं होता।


‘किरण बेदी’ की बायोपिक करना चाहूंगी


अगर मुझे कोई बायॉपिक करने को मिले तो मैं जरूर किरण बेदी का रोल करना चाहूंगी।दरअसल मैं बचपन से ही उनसे बहुत ज्यादा प्रेरित रही हूं।स्कूल और कॉलेज टाइम में मेरे ब्वॉय कट बाल थे और लोग मुझसे जब भी पूछते थे कि बड़ा होकर क्या बनना चाहती हो तो मेरा हमेशा एक ही जवाब रहता था कि मैं किरण बेदी बनना चाहूंगी। अगर मुझे उनके किरदार को जीने का मौका मिला तो मुझे बेहद खुशी होगी।

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