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NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, भावुक पत्र में बोले- युवाओं का भविष्य सबसे ऊपर

25 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, भावुक पत्र में बोले- युवाओं का भविष्य सबसे ऊपर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेजने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक भावुक पत्र के जरिए दी।


अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की परिस्थितियों ने उन्हें गहराई से व्यथित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और राष्ट्रहित की है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश की युवा शक्ति भ्रम, तनाव और कानूनी पेचीदगियों में उलझे तथा राष्ट्रविरोधी ताकतें मौजूदा हालात का लाभ उठाएं।


NEET पेपर लीक के बाद बढ़ा था विवाद

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मामले को तत्काल गंभीरता से लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया। साथ ही, अगले वर्ष से NEET परीक्षा को Computer-Based Test (CBT) मोड में आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से कराना रही। केंद्र, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों के सहयोग से 21 जून को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।


'जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटा'

अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि उन्होंने पहले दिन से ही पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी परिस्थितियों से मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया की वजह से बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे, जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कई प्रतिभाशाली छात्रों ने भी सफलता हासिल की।


'पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने किया दुखी'

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि पिछले दस दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि है और भारत की युवा शक्ति ही देश के विकसित भविष्य की सबसे बड़ी आधारशिला है।


जंतर-मंतर के आंदोलन का भी किया उल्लेख

अपने इस्तीफे के पीछे का कारण बताते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देशभर में बने हालात को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है ताकि देश की एकता बनी रहे, छात्र कानूनी विवादों में न उलझें और उनका ध्यान केवल पढ़ाई एवं अपने करियर पर केंद्रित रहे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और भविष्य में भी वे देश, ओडिशा तथा युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हरसंभव योगदान देते रहेंगे।


अब आगे क्या?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार के सामने नया शिक्षा मंत्री नियुक्त करने की चुनौती होगी। वहीं, NEET विवाद और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। छात्रों के आंदोलन के बाद आया यह इस्तीफा केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

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