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एमपी का वह कॉलेज जो 150 साल से है बघेलखंड की शान, जिसने देश को दिए बड़े नेता और न्यायविद

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एमपी का वह कॉलेज जो 150 साल से है बघेलखंड की शान, जिसने देश को दिए बड़े नेता और न्यायविद

एमपी का वह कॉलेज जो 150 साल से है बघेलखंड की शान, जिसने देश को दिए बड़े नेता और न्यायविद

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रीवा और पूरे बघेलखंड में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जिसका नाता ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय यानी TRS कॉलेज से न जुड़ा हो। यह सिर्फ एक कॉलेज नहीं, बल्कि एक परंपरा है, जिसने पीढ़ियों को पढ़ाया, आगे बढ़ाया और देश को काबिल नागरिक दिए।


TRS कॉलेज की पहचान

रीवा का TRS कॉलेज 1994 में स्वशासी महाविद्यालय बना और 2002 में इसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा मिला। नैक ने 2009 और 2016 में इसे ‘ए’ ग्रेड दिया, जबकि 2010 में यूजीसी ने इसे CPE का सम्मान प्रदान किया। आज यह कॉलेज बघेलखंड का सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान माना जाता है।


कैसे हुई TRS कॉलेज की शुरुआत

इस ऐतिहासिक कॉलेज की नींव 1869 में एक पब्लिक स्कूल के रूप में रखी गई थी। 1882 में यह दरबार हाई स्कूल बना। ब्रिटिश काल में इसे महाराजा रघुराज सिंह ने आगे बढ़ाया। 1944 में यह डिग्री कॉलेज बना और 1957 में इसका नाम बदलकर ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय यानी TRS कॉलेज कर दिया गया। आज यहां BA, MA, BSc, MSc, LLB, LLM और PhD तक की पढ़ाई होती है और यह संस्थान विश्वविद्यालय बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा गौरव

1857 की क्रांति के दौरान विंध्य और रीवा क्षेत्र भी आजादी की लड़ाई में पीछे नहीं रहे। सतना जिले के वीर क्रांतिकारी ठाकुर रणमत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला और रीवा-पन्ना इलाके को मुक्त कराने की कोशिश की। आखिरकार उन्हें उपरहटी के जालपा देवी मंदिर से गिरफ्तार कर आगरा जेल में फांसी दे दी गई। उनके बलिदान ने पूरे बघेलखंड को प्रेरणा दी।


देश को मिले TRS के सितारे

TRS कॉलेज के एलुमनी ने देश के बड़े पदों पर अपनी छाप छोड़ी है। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री कुंवर अर्जुन सिंह, न्यायाधीश जी पी सिंह और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वर्मा जैसे नाम इसी संस्थान से निकले हैं। इन सभी ने राजनीति, न्यायपालिका और प्रशासन में देश की सेवा की है।


छात्रों की ताकत, समाज की पहचान

150 साल पुराने इस कॉलेज के छात्र हमेशा समाज और देश के लिए योगदान देने में आगे रहे हैं। शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी TRS कॉलेज की पहचान रही है।

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