
डबरा। नवग्रह शक्ति पीठ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के छठवें दिन सोमवार को रामकथा विश्राम के अवसर पर कवि व विचारक डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि सत्य और धर्म का साथ छोड़ने वाले नष्ट हो जाते हैं। परिवार और संस्कार ही समाज की रक्षा कर सकते हैं, और संस्कारों की जड़ रामकथा में निहित है।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि आज का मानव छोटी-छोटी निराशाओं में टूट जाता है, जबकि भगवान श्रीराम का जीवन संघर्षों के बीच भी संयम, धैर्य और धर्म पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि राजपाट से वनवास, पत्नी वियोग और भ्राता लक्ष्मण की मूर्छा जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रीराम का संयम यह सिखाता है कि धर्म से जुड़ा मन कभी टूटता नहीं।
डॉ. कुमार विश्वास ने राम चरित्र की तुलना राष्ट्र चरित्र से करते हुए कहा कि यदि राष्ट्र का चरित्र नष्ट हो जाए तो उसका कोई विकल्प नहीं होता। रामकथा हमें यह सिखाती है कि परिवार, समाज और राष्ट्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। परिवार में प्रेम और संस्कार नहीं होंगे तो समाज कमजोर होगा और समाज कमजोर हुआ तो राष्ट्र अस्थिर हो जाएगा। पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने डॉ. कुमार विश्वास का अभिनंदन किया।
रामकथा को संस्कारों का अमोघ कवच बताया
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि आज आधुनिक माध्यमों के जरिए परिवार और संस्कारों पर निरंतर प्रहार हो रहा है, जिससे आत्मिक दुर्बलता बढ़ रही है। उन्होंने रामकथा को संस्कारों का अमोघ कवच और इम्यूनिटी बूस्टर बताते हुए कहा कि यही कथा हमारी आत्मा, परिवार और संस्कृति की रक्षा कर सकती है। उन्होंने रामायण और महाभारत के उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि संबंधों से ऊपर सत्य और धर्म का स्थान है। जो सत्य का साथ छोड़ता है, उसकी प्रगति का रथ एक दिन अवश्य रुक जाता है।
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