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टीकमगढ़ जेल विवाद: अफसरों की तीखी बहस के बाद डिप्टी जेलर का इस्तीफा, गाली-गलौज के आरोप से मचा हड़कंप

25 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
टीकमगढ़ जेल विवाद: अफसरों की तीखी बहस के बाद डिप्टी जेलर का इस्तीफा, गाली-गलौज के आरोप से मचा हड़कंप
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

टीकमगढ़ जेल विवाद ने मध्यप्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि डिप्टी जेलर ने इस्तीफा तक भेज दिया, हालांकि बाद में मामला संभाल लिया गया।


कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

रिपोर्ट के अनुसार, टीकमगढ़ जेल से एक कैदी को सागर जेल भेजा गया था, जहां से उसे जमानत मिल गई। बाहर आने के बाद उसने टीकमगढ़ जेल में खराब व्यवहार की शिकायत की। इसके बाद उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए और जांच की जिम्मेदारी सागर जेल प्रशासन को सौंपी गई। यहीं से विवाद की पृष्ठभूमि तैयार हुई।


जांच के दौरान बढ़ा टकराव

जांच के लिए अधिकृत अधिकारी जब टीकमगढ़ जेल पहुंचे, तब जेल अधीक्षक की अनुपस्थिति में वे डिप्टी जेलर अश्विनी शुक्ला के साथ उनके चेंबर में बैठ गए। इसी दौरान जेल अधीक्षक यजुवेंद्र बाघमारे वहां पहुंचे और इस पर आपत्ति जताई। बताया जाता है कि इसी बात पर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसने गंभीर रूप ले लिया।


गाली-गलौज के आरोप, इस्तीफा तक पहुंचा मामला

डिप्टी जेलर अश्विनी शुक्ला ने आरोप लगाया कि अधीक्षक ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और गाली-गलौज की। इससे आहत होकर उन्होंने सीधे जेल मुख्यालय को अपना इस्तीफा भेज दिया। यह खबर सामने आते ही विभाग में हड़कंप मच गया और मामला तेजी से ऊपर तक पहुंच गया।


जेल मुख्यालय के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल मुख्यालय ने तुरंत हस्तक्षेप किया। अधिकारियों के बीच बातचीत कर स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा के बाद डिप्टी जेलर ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया, जिससे तत्काल संकट टल गया।


DG का बयान: आवेश में दिया गया इस्तीफा

जेल विभाग के डीजी वरुण कपूर ने बताया कि विवाद के दौरान भावनात्मक स्थिति में आकर इस्तीफा दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है और मामले को शांत करा दिया गया है।


जांच शुरू, डीआईजी को सौंपी जिम्मेदारी

पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए मामला डीआईजी स्तर के अधिकारी को सौंप दिया गया है। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि किसकी जिम्मेदारी तय होगी और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।


विभाग में उठे कई सवाल

इस घटना ने जेल प्रशासन की कार्यशैली और अधिकारियों के आपसी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद न सिर्फ सिस्टम की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी असर डालते हैं।

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