
वॉशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। गुरुवार को वॉशिंगटन में आयोजित 74वें नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और वेनेजुएला मिलकर दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार से जुड़े हलकों में तीखी चर्चा शुरू हो गई है।
वेनेजुएला गंभीर संकट में था – ट्रंप का दावा
अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला लंबे समय से गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से गुजर रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसके पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार मौजूद हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संभवतः वेनेजुएला के तेल भंडार अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर आते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला के पास दुनिया के कुल प्रमाणित तेल भंडार का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है, जबकि अमेरिका का हिस्सा इससे कम आंका जाता है।
अमेरिकी दावों पर खड़ा हुआ कानूनी और राजनीतिक विवाद
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला पर “नियंत्रण” स्थापित किया और वहां की तेल संपदा का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने एक कथित सैन्य कार्रवाई का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया। हालांकि, इन दावों की न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि हुई है और न ही वेनेजुएला सरकार या स्वतंत्र स्रोतों ने ऐसी किसी सैन्य कार्रवाई को स्वीकार किया है। इसी वजह से ट्रंप के बयान को लेकर कानूनी और कूटनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं।
तेल ढांचे में निवेश की बात, लेकिन हकीकत अलग
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में जाकर अरबों डॉलर का निवेश करेंगी, जर्जर हो चुकी तेल संरचना को सुधारेंगी और बड़े पैमाने पर तेल उत्पादन व निर्यात किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, वेनेजुएला का तेल उद्योग लंबे समय से तकनीकी, वित्तीय और प्रतिबंधों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है और किसी भी विदेशी निवेश के लिए अंतरराष्ट्रीय सहमति और कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी।
वैश्विक ऊर्जा राजनीति में बढ़ी बेचैनी
ट्रंप के इस बयान को वैश्विक ऊर्जा बाजार में रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। अमेरिका-वेनेजुएला संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं और ऐसे में तेल भंडार को लेकर किया गया यह दावा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय विवाद को और गहरा कर सकता है।
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