
भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में कोर्ट के ताजा आदेश ने पुलिस और फोरेंसिक विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग खारिज कर दी, लेकिन शव को -80°C तापमान पर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। समस्या यह है कि मध्य प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में इतनी कम तापमान वाली सुविधा मौजूद नहीं है। अब प्रशासन के सामने कोर्ट के आदेश का पालन सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
एम्स भोपाल में रखा है ट्विशा का शव
ट्विशा का शव 13 मई से एम्स भोपाल की मॉर्चुरी में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को बताया कि वहां का तापमान केवल -4°C तक ही रखा जा सकता है। फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तापमान पर शव सिर्फ 4-5 दिन तक सुरक्षित रह सकता है। लंबे समय तक संरक्षण के लिए -50°C से -80°C तापमान जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है।
फोरेंसिक अधिकारियों ने भी जताई असमर्थता
फोरेंसिक साइंस विभाग के डायरेक्टर शशिकांत शुक्ला और पूर्व डायरेक्टर डॉ. डीके सतपथी ने भी स्वीकार किया है कि प्रदेश में ऐसी हाई-फ्रीजिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस खुलासे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कोर्ट के निर्देशों का पालन कैसे होगा। अब संभावना जताई जा रही है कि शव को दूसरे राज्य या किसी विशेष लैब में शिफ्ट करने पर विचार किया जा सकता है।
पिता ने जांच प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि अपील में देरी के कारण शव की स्थिति प्रभावित हुई, जिससे अहम सबूत कमजोर पड़ सकते हैं। परिवार का कहना है कि जांच की पूरी प्रक्रिया कई सवाल खड़े कर रही है। इसी वजह से अब मामले को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।
परिवार के वकील ने पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पर उठाए सवाल
परिवार के वकील अंकुर पांडे का दावा है कि पोस्टमॉर्टम 13 मई को हुआ, लेकिन कथित फंदा या बेल्ट फोरेंसिक डॉक्टरों को 15 मई तक नहीं सौंपा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना कथित लिगेचर मटेरियल देखे मौत के कारण का निष्कर्ष कैसे निकाला गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान ट्विशा की सास की बहन, जो वरिष्ठ डॉक्टर हैं, एम्स में मौजूद थीं।
जांच एजेंसियों से परिवार के पांच बड़े सवाल
परिवार ने जांच एजेंसियों के सामने कई गंभीर सवाल रखे हैं। इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि 12 मई की रात मौत होने के बावजूद FIR 15 मई को क्यों दर्ज हुई। इसके अलावा परिवार ने पूछा कि कथित फंदा फोरेंसिक टीम को समय पर क्यों नहीं दिया गया, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशानों का क्या मतलब है और आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर क्यों है।
“मां, मेरा दम घुट रहा है…” चैट्स से बढ़ी संवेदनशीलता
ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई वॉट्सएप चैट्स को परिवार बेहद अहम सबूत मान रहा है। इन संदेशों में मानसिक तनाव और वैवाहिक विवाद के संकेत दिखाई देते हैं।
30 अप्रैल को ट्विशा ने मां को लिखा — “क्यों भेजा मुझे यहां... मेरा जीवन नरक हो गया है।”
7 मई की रात उसने मैसेज किया — “मां, मुझे यहां से लेने आ जाओ…”
वहीं, मौत से एक दिन पहले यानी 11 मई को ट्विशा ने लिखा — “मेरा मन कहीं नहीं लगता।”
इन चैट्स के सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में है।
आरोपी समर्थ ने हाईकोर्ट में लगाई जमानत अर्जी
मामले के आरोपी समर्थ की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की गई है। हालांकि, फिलहाल सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। इधर, निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद ट्विशा का परिवार भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। परिवार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर न्याय और सबूतों के संरक्षण की मांग की है।
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