
भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह फिलहाल 16 जून तक न्यायिक हिरासत में हैं। दूसरी ओर जांच एजेंसी अब ट्विशा के मानसिक स्वास्थ्य, प्रेग्नेंसी और डिजिटल सबूतों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। CBI यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्विशा को वास्तव में कोई मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या थी या इस दावे का आधार क्या था।
डॉक्टर से पूछताछ, मेडिकल रिकॉर्ड की भी जांच
सूत्रों के अनुसार CBI अधिकारियों ने मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से भी पूछताछ की है। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि ट्विशा का इलाज किस कारण से चल रहा था और उससे जुड़े दस्तावेजों का वास्तविक संदर्भ क्या था। डॉ. त्रिवेदी ने पूछताछ की पुष्टि की है, लेकिन मरीज की गोपनीयता का हवाला देते हुए उपचार या काउंसलिंग से जुड़ी कोई निजी जानकारी साझा करने से इनकार किया।
'एडजस्टमेंट डिसऑर्डर' के दावे की भी पड़ताल
जांच के दौरान समर्थ सिंह ने दावा किया कि ट्विशा के व्यवहार में अचानक बदलाव आता था और इसी कारण उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया था। उनके अनुसार डॉक्टर ने ट्विशा में 'एडजस्टमेंट डिसऑर्डर' की संभावना बताई थी। वहीं परिवार का कहना है कि गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं के बाद ही इलाज और दवाइयां शुरू हुई थीं। उनका दावा है कि इस दौरान ट्विशा का वजन करीब 15 किलोग्राम तक कम हो गया था।
प्रेग्नेंसी बनी जांच का अहम बिंदु
सूत्रों के मुताबिक CBI की जांच में प्रेग्नेंसी से जुड़ा पहलू भी प्रमुखता से शामिल है। जांच एजेंसी डिजिटल सबूतों के आधार पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि दंपती के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या थी। परिवार की ओर से पहले यह भी कहा गया था कि ट्विशा और समर्थ ने आपसी सहमति से 30 अप्रैल को गर्भावस्था समाप्त कराने का निर्णय लिया था। CBI इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।
लैपटॉप और मोबाइल से मिल सकते हैं अहम सुराग
CBI फिलहाल ट्विशा और समर्थ सिंह के लैपटॉप तथा मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चैट, कॉल रिकॉर्ड, ईमेल, लोकेशन और अन्य डिजिटल डेटा से घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों के बारे में क्या जानकारी मिलती है। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद हो सकते थे, उन्हें शुरुआती जांच के दौरान तुरंत जब्त क्यों नहीं किया गया। इस पहलू की भी जांच के दायरे में समीक्षा की जा रही है।
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