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ट्विशा शर्मा केस में आखिर क्यों जरूरी है आरोपी के लैपटॉप का पासवर्ड? कोर्ट में CBI ने बताई वजह

30 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
ट्विशा शर्मा केस में आखिर क्यों जरूरी है आरोपी के लैपटॉप का पासवर्ड? कोर्ट में CBI ने बताई वजह
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल के ट्विशा शर्मा प्रकरण में मंगलवार को अदालत में अहम सुनवाई हुई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की कोर्ट जी-14 में हुई। कार्यवाही के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत में मौजूद रहे।


CBI ने जांच पूरी होने तक हिरासत जारी रखने की दलील दी

CBI ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी के अनुसार, जांच को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए दोनों आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना आवश्यक है। एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।


डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी

CBI ने अदालत को बताया कि जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है। इसके अलावा कई गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाने बाकी हैं। एजेंसी का कहना है कि इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने में अभी समय लगेगा।


समर्थ सिंह के लैपटॉप का पासवर्ड बना जांच की चुनौती

सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि जांच के लिए समर्थ सिंह के लैपटॉप तक पहुंच जरूरी है, लेकिन अब तक उसका पासवर्ड उपलब्ध नहीं हो सका है। एजेंसी के मुताबिक, लैपटॉप में मौजूद संभावित महत्वपूर्ण जानकारी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए पासवर्ड की आवश्यकता है, ताकि फॉरेंसिक जांच पूरी की जा सके।


जरूरत पड़ने पर दोबारा पुलिस रिमांड की भी संभावना

CBI ने अदालत को पहले ही अवगत कराया था कि यदि जांच के दौरान आवश्यकता महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय की जाएगी।


अदालत के फैसले पर सभी की नजर

अब इस मामले में अदालत के आदेश का इंतजार है। यदि CBI का अनुरोध स्वीकार किया जाता है, तो समर्थ सिंह और रिटायर्ड जज गिरिबाला 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे और इस दौरान एजेंसी अपनी जांच आगे बढ़ाएगी।

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