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ट्विशा शर्मा डेथ केस: पुलिस की 5 बड़ी चूकें, 9 दिन बाद भी फरार पति समर्थ सिंह

21 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
ट्विशा शर्मा डेथ केस: पुलिस की 5 बड़ी चूकें, 9 दिन बाद भी फरार पति समर्थ सिंह
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की चर्चित एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब सिर्फ एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि पुलिस जांच पर बड़े सवालों का केंद्र बन गया है। घटना के 9 दिन बाद भी मुख्य आरोपी समर्थ सिंह फरार है और इसी बीच पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले में बढ़ते दबाव के बीच पुलिस कमिश्नर ने आरोपी पर इनाम राशि ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार कर दी है। SIT जांच, लुकआउट नोटिस और छह टीमों की तलाश के बावजूद आरोपी अब तक पुलिस पकड़ से बाहर है।


पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद भी नहीं हुई तुरंत कार्रवाई

सूत्रों के मुताबिक, भोपाल AIIMS की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट घटना के 24 घंटे के भीतर पुलिस को मिल गई थी। रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर कई चोटों के निशान होने का जिक्र था। इसके बावजूद पुलिस समय रहते आरोपी तक नहीं पहुंच सकी। वहीं, परिवार शुरुआत से ही मौत को संदिग्ध बता रहा था और कार्रवाई में लापरवाही के आरोप लगा रहा था। यही वजह है कि अब मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर गरमा गया है।


परिजनों का आरोप- थाने में किया गया दुर्व्यवहार

ट्विशा के परिवार ने कटारा हिल्स थाने की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि 13 मई की रात जब वे थाने पहुंचे, तब थाना प्रभारी और स्टाफ ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। परिवार का दावा है कि उन्हें थाने के बाहर जाने तक के लिए कहा गया। हालांकि, थाना प्रभारी सुनील दुबे ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि थाने में लगे CCTV कैमरे पूरे घटनाक्रम की सच्चाई दिखा सकते हैं।


कोर्ट ने दोबारा पोस्टमॉर्टम से किया इनकार

भोपाल कोर्ट ने फिलहाल दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग खारिज कर दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनूदिता गुप्ता ने कहा कि प्रदेश के बाहर दोबारा पोस्टमॉर्टम की अनुमति देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। हालांकि कोर्ट ने शव को सुरक्षित रखने के लिए अहम निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि बॉडी को माइनस 80 डिग्री तापमान में प्रिजर्व किया जाए, ताकि आगे जांच प्रभावित न हो।


AIIMS मर्चुरी में सिर्फ माइनस 4 डिग्री सुविधा

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी माना कि भोपाल AIIMS की मौजूदा मर्चुरी में सिर्फ माइनस 4 डिग्री तापमान पर शव रखने की सुविधा है। इस तापमान में शव अधिकतम 4 से 5 दिन तक ही सुरक्षित रह सकता है। इसी वजह से लंबे समय तक बॉडी प्रिजर्व करने के लिए हाई-फ्रीज सुविधा जरूरी बताई गई है। अब इस आदेश के बाद मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है।


हाईकोर्ट जाएंगे ट्विशा के परिजन

ट्विशा का परिवार अब सेकंड पोस्टमॉर्टम की मांग लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। खास बात यह है कि ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह की ओर से भी कोर्ट में लिखित सहमति दी गई है कि दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया जा सकता है। परिवार का आरोप है कि मामले में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है। इसी वजह से वे स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं।


CBI जांच की तैयारी में मध्यप्रदेश सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ट्विशा के परिजनों से मुलाकात के बाद बड़ा आश्वासन दिया है। सरकार अब इस मामले की CBI जांच के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोर्ट दोबारा पोस्टमॉर्टम की अनुमति देता है, तो सरकार पार्थिव शरीर को दिल्ली AIIMS तक पहुंचाने की व्यवस्था करेगी। इससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।


राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान

मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। वहीं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी CBI जांच की मांग उठाई है। उधर, फरार पति समर्थ सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि SIT हर एंगल से जांच कर रही है, लेकिन अब तक आरोपी का नहीं मिलना सवाल खड़े कर रहा है।


पुलिस बोली- शुरुआती जांच में आत्महत्या का मामला

पुलिस कमिश्नर संजय सिंह का कहना है कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। उनके मुताबिक ट्विशा के गले पर मिले निशान बेल्ट से फांसी लगाने जैसे हैं। हालांकि, परिवार इस थ्योरी से सहमत नहीं है। यही वजह है कि मामला अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जनभावनाओं का मुद्दा भी बनता जा रहा है।


रिटायर्ड जज को पद से हटाने की मांग

ट्विशा के परिजनों ने रिटायर्ड जज गिरीबाला Singh को डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम से हटाने की मांग भी उठाई है। इसके लिए राज्यपाल डॉ. मंगू भाई पटेल को पत्र भेजा गया है। परिवार का कहना है कि दहेज हत्या की FIR दर्ज होने के बाद किसी संवैधानिक पद पर बने रहना उचित नहीं है। अब इस मांग ने मामले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है।

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