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ट्विशा शर्मा मौत मामले में नया खुलासा, मोबाइल-लैपटॉप की जब्ती पर उठे बड़े सवाल

16 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
यह AI जनरेटेड फोटो है।

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Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल की अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत की जांच में एक नया मोड़ सामने आया है। मोबाइल और लैपटॉप की जब्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की आशंका ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच, आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की न्यायिक अभिरक्षा मंगलवार को पूरी हो रही है और दोनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।


जब्ती दस्तावेजों में दिखा अंतर

कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार 13 मई को उप-निरीक्षक दिनेश शर्मा द्वारा जब्त किए गए सामान, जिनमें फंदा, मोबाइल फोन और लैपटॉप शामिल थे, उन्हें कथित तौर पर सील नहीं किया गया था। वहीं 23 मई को थाना प्रभारी सुनील दुबे की ओर से तैयार जब्ती दस्तावेज में गिरिबाला सिंह का मोबाइल और हेडफोन सीलबंद हालत में जब्त किए जाने का उल्लेख किया गया है। दोनों दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के अंतर ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


जांच की पारदर्शिता पर सवाल

जब्ती प्रक्रिया में सामने आए इस अंतर के बाद साक्ष्यों की सुरक्षा और जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में जांच कर रहे अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।


वकील ने छेड़छाड़ की आशंका जताई

ट्विशा शर्मा के वकील अंकुर पांडेय का दावा है कि जब्त सामग्री को सील नहीं किए जाने से साक्ष्यों के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि जब्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।


आज कोर्ट में होगी अहम सुनवाई

पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की न्यायिक अभिरक्षा मंगलवार को समाप्त हो रही है। दोनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार सीबीआई नए साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रख सकती है। साथ ही दोनों आरोपियों को आगे पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड पर लेने की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है।


जांच पर टिकी सबकी नजर

मामले में जब्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बाद अब सभी की नजर कोर्ट की कार्यवाही और सीबीआई की अगली कार्रवाई पर है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि जांच में सामने आए दस्तावेजी अंतर का इस केस पर कितना प्रभाव पड़ता है।

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