
उज्जैन के इंगोरिया विकासखंड की एक आंगनवाड़ी इन दिनों बच्चों के समग्र विकास की नई मिसाल बन रही है। यहां कार्यरत बॉक्सर दिव्या नागर छोटे बच्चों को योग, फिटनेस और खेलों से जोड़कर उन्हें अनुशासित और आत्मविश्वासी बनाने का प्रयास कर रही हैं।
30 जुलाई 2026 को सामने आई इस पहल में दिव्या नागर का लक्ष्य केवल बच्चों के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। उनका सपना है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे आगे चलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करें।
बच्चों को खेल और योग से जोड़ने की पहल
आंगनवाड़ी में आने वाले बच्चों को नियमित रूप से योगासन, प्राणायाम और बेसिक फिटनेस गतिविधियां कराई जा रही हैं। इसके साथ ही उन्हें खेलों के प्रति भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि शुरुआती उम्र से ही अनुशासन और सक्रिय जीवनशैली विकसित हो सके। दिव्या नागर का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे बड़े मंचों तक पहुंच सकते हैं।
फिटनेस के साथ सिखा रहीं अनुशासन
रिंग में बॉक्सिंग का अनुभव रखने वाली दिव्या अब उसी अनुभव का उपयोग बच्चों को बुनियादी फिटनेस और पंचिंग की शुरुआती ट्रेनिंग देने में कर रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों में फुर्ती, लगन और आत्मविश्वास विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनका कहना है कि योग बच्चों के शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को शांत और एकाग्र भी बनाता है। खेल और योग से हार का डर कम होता है और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है।
गांव के लोगों की सोच में आया बदलाव
शुरुआत में गांव के कई लोग आंगनवाड़ी को केवल पोषाहार और टीकाकरण तक सीमित मानते थे। अब वे देख रहे हैं कि इसी केंद्र के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य, सोच और व्यक्तित्व विकास पर भी सकारात्मक काम किया जा सकता है। इस पहल के बाद गांव में आंगनवाड़ी की भूमिका को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिला है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक बच्चों को पहुंचाने का सपना
दिव्या नागर की सबसे बड़ी इच्छा है कि उनके गांव का कोई बच्चा भविष्य में राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराए और आगे चलकर ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतकर देश का नाम रोशन करे। इसी लक्ष्य के साथ वे बच्चों को शुरुआती स्तर से तैयार करने में जुटी हैं।
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