
उज्जैन। इस वर्ष भगवान महाकाल की श्रावण-भादौ मास की छह सवारियां धार्मिक परंपरा के साथ-साथ प्रशासनिक तैयारियों की भी कसौटी बनेंगी। जिला प्रशासन ने 3 अगस्त से 7 सितंबर तक निकलने वाली इन सवारियों को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के पहले बड़े फील्ड परीक्षण के रूप में लेने का फैसला किया है।
आने वाले दिनों में सवारी के दौरान जुटने वाली भीड़, यातायात, पार्किंग, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि दो वर्ष बाद होने वाले सिंहस्थ से पहले कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सके।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की समीक्षा बैठक में कलेक्टर एवं समिति अध्यक्ष रौशन कुमार सिंह ने सभी विभागों से तय समयसीमा के भीतर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रशासन के लिए इस बार की सवारियां केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सिंहस्थ-2028 की व्यवस्थाओं का व्यावहारिक परीक्षण भी होंगी।
पहली बार होगा वैज्ञानिक डेटा संग्रह
इस बार उज्जैन स्मार्ट सिटी श्रद्धालुओं और वाहनों का वैज्ञानिक सर्वे कराएगी। इसके जरिए वास्तविक आंकड़े जुटाए जाएंगे, जिनमें शामिल होंगे—
- श्रद्धालु किस राज्य और शहर से पहुंचे।
- किस परिवहन माध्यम का उपयोग किया।
- किन मार्गों से शहर में प्रवेश और निकास किया।
- किस स्थान पर वाहन पार्क किए।
- शहर में कितना समय बिताया।
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की ट्रैफिक व्यवस्था, पार्किंग नीति, सार्वजनिक परिवहन, शटल सेवा और भीड़ नियंत्रण की रणनीति तैयार की जाएगी।
17 अगस्त रहेगा सबसे बड़ी चुनौती का दिन
प्रशासन के अनुसार 17 अगस्त को तीसरे सावन सोमवार पर विशेष चुनौती रहेगी। इसी दिन महाकाल की सवारी और नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन का दुर्लभ संयोग बनेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस दिन श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रहने की संभावना है। इसलिए इस तारीख के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि भीड़ और यातायात का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।
सिंहस्थ परियोजनाओं की भी होगी वास्तविक परीक्षा
सरकार पहले ही सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए सड़क, पुल, घाट, पार्किंग, पेयजल, सीवरेज और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम शुरू करा चुकी है। श्रावण की सवारियों के दौरान इन व्यवस्थाओं की उपयोगिता का वास्तविक परीक्षण होगा। यदि कहीं ट्रैफिक, सुरक्षा, पार्किंग या भीड़ प्रबंधन में कमी सामने आती है तो सिंहस्थ से पहले उसमें सुधार करने का पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा।
तैयार होगा 'श्रद्धालु इंटेलिजेंस सिस्टम'
प्रशासन पहली बार श्रद्धालुओं की आवाजाही और यात्रा व्यवहार का डिजिटल डेटाबेस तैयार करेगा। इस डेटा से यह समझने में मदद मिलेगी कि—
- किस समय किन मार्गों पर सबसे अधिक दबाव रहता है।
- किस क्षेत्र में अतिरिक्त पार्किंग की जरूरत है।
- श्रद्धालु शहर में औसतन कितना समय रुकते हैं।
- किन स्थानों पर अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता है।
यही डिजिटल डेटा भविष्य में सिंहस्थ-2028 की ट्रैफिक, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन संबंधी योजनाओं की आधार रिपोर्ट के रूप में उपयोग किया जाएगा।
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