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उज्जैन में संतों की शरण में पहुंचे नितिन नवीन, सिंहस्थ और अखाड़ा परिषद पर हुई चर्चा

18 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
उज्जैन में संतों की शरण में पहुंचे नितिन नवीन, सिंहस्थ और अखाड़ा परिषद पर हुई चर्चा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

उज्जैन। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उज्जैन में दीपोत्सव कार्यक्रम से पहले दो प्रमुख अखाड़ों के संतों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी उनके साथ रहे।


नवीन ने बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत सत्यानंद महाराज और दत्त अखाड़े के गादीपति पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज से आशीर्वाद लिया। मुलाकातों में आगामी सिंहस्थ की तैयारियों और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे मतभेदों का विषय भी सामने आया। 


नाव से बड़ा उदासीन अखाड़े पहुंचे

नितिन नवीन मुख्यमंत्री मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल के साथ नाव में सवार होकर बड़ा उदासीन अखाड़े पहुंचे। वहां करीब 15 मिनट तक संतों से मुलाकात हुई।


उन्होंने महंत सत्यानंद महाराज और महंत देवीदास से भेंट कर आशीर्वाद लिया। महंत सत्यानंद ने उनका स्वागत करते हुए प्रतीक चिह्न प्रदान किया।


इसके बाद नवीन ने अखाड़े में स्थित श्री चंद्र आचार्य मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। महंत सत्यानंद के अनुसार, 20 सितंबर को जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान का 532वां जन्मोत्सव मनाया जाना है।


26 लाख की नौकरी छोड़कर अपनाया संत जीवन

बड़ा उदासीन अखाड़े के युवा महंत सत्यानंद बिहार के सुपौल के रहने वाले हैं। 27 वर्ष की उम्र में वे संत जीवन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


उन्हें विदेश की एक मल्टीनेशनल कंपनी से सालाना 26 लाख रुपये की नौकरी का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने अध्यात्म और समाज सेवा का रास्ता चुना।


2019 में ली दीक्षा, कई स्थानों पर संभाली महंत की जिम्मेदारी

  • महंत सत्यानंद ने 2019 में दीक्षा ली। इसके बाद उनका जीवन साधना और समाज सेवा को समर्पित रहा।

  • 2020: गया में महंत की जिम्मेदारी संभाली।

  • इसके बाद हरिद्वार में कुंभ मेला प्रबंधन से जुड़े और महंत पद संभाला।

  • बाद में वाराणसी में महंत रहे।

  • वर्तमान में उज्जैन के बड़ा उदासीन अखाड़े में महंत हैं।

  • युवाओं और साधकों को योग, संस्कृत और अध्यात्म की शिक्षा देते हैं।


दत्त अखाड़े में सुंदरपुरी महाराज से मुलाकात

इसके बाद नितिन नवीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, दत्त अखाड़े के गादीपति पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज से मुलाकात की।


यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर रामघाट में आयोजित दीपोत्सव में शामिल होने से पहले हुई। नवीन और मुख्यमंत्री ने संत से आशीर्वाद लिया।


पीर श्रीमहंत सुंदरपुरी महाराज ने जनवरी 2018 में परमानंदपुरी जी के ब्रह्मलीन होने के बाद फरवरी 2018 से दत्त अखाड़े के गादीपति के रूप में संचालन की जिम्मेदारी संभाली है।


उन्होंने बाल्यावस्था में ही सांसारिक जीवन छोड़ दिया था और महज 3 वर्ष की उम्र में संन्यास परंपरा यानी नागा दीक्षा में प्रवेश किया था।


सिंहस्थ 2028 और अखाड़ा परिषद का मुद्दा

आगामी दो वर्षों में हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में कुंभ मेलों का आयोजन होना है। इन आयोजनों को लेकर तैयारियां चल रही हैं।


उज्जैन के आगामी सिंहस्थ के संदर्भ में अखाड़ों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी पृष्ठभूमि में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर मौजूद मतभेद भी चर्चा का विषय रहे।


मौजूदा स्थिति के अनुसार, उदासीन अखाड़ा महानिर्वाणी अखाड़े को अध्यक्ष मानने के पक्ष में है, जबकि दत्त अखाड़े के महंत निरंजनी अखाड़े के रविंद्रपुरी महाराज को अध्यक्ष के रूप में देखते हैं।


संतों ने सिंहस्थ के लिए की प्रार्थना

महंत सत्यानंद महाराज ने बताया कि नितिन नवीन ने श्री चंद्र भगवान की पूजा-अर्चना की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।


उनके मुताबिक, सभी 13 अखाड़े आपस में जुड़े हुए हैं और प्रत्येक का अपना सम्मानित स्थान है। संतों के साथ प्रार्थना की गई कि आगामी सिंहस्थ दिव्य और भव्य हो तथा विश्वस्तरीय आयोजन सकुशल संपन्न हो।

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