
भोपाल। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश अब आर्थिक साझेदारी के नए मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं। वाराणसी में होने जा रहा UP-MP सहयोग सम्मेलन 2026 इस दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस सम्मेलन में दोनों राज्यों के उद्यमी, निर्यातक और शिल्पकार एक मंच पर आएंगे।
उद्घाटन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav करेंगे।
सम्मेलन में औद्योगिक क्षमता, बाजार संभावनाएं, कृषि उत्पाद और निवेश अवसरों पर गहन चर्चा होगी।
साथ ही ODOP और GI टैग उत्पादों को भी वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की रणनीति बनेगी।
ODOP और GI उत्पादों की प्रदर्शनी से बढ़ेगा व्यापार
सम्मेलन स्थल पर मध्य प्रदेश के ODOP और GI टैग वाले उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इससे निवेशकों और व्यापारियों को इन उत्पादों की गुणवत्ता और संभावनाओं को समझने का मौका मिलेगा। यह पहल स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों के लिए नए बाजार खोल सकती है।यानी सम्मेलन सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि व्यापार बढ़ाने का सीधा प्लेटफॉर्म भी बनेगा।
गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर पर खास फोकस
सम्मेलन में शिल्पकारों के लिए संयुक्त कार्यशाला भी आयोजित होगी। इसमें चंदेरी, महेश्वरी और बनारसी सिल्क के कारीगर एक साथ बैठकर रणनीति बनाएंगे। “गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर” की अवधारणा पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान और बड़ा बाजार दिलाना है—जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
पर्यटन में बड़ा प्लान: वाराणसी-उज्जैन-चित्रकूट कनेक्ट
पर्यटन सेक्टर में दोनों राज्य बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं।nराउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में वाराणसी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़कर धार्मिक पर्यटन सर्किट बनाने पर चर्चा होगी। अगर यह योजना लागू होती है, तो देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक साथ जोड़ने वाला बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकता है। जिससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी, काशी मॉडल से सीख
मुख्यमंत्री Mohan Yadav इस दौरे के दौरान काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भी निरीक्षण करेंगे। उनका फोकस उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों को बेहतर बनाना है। वह कॉरिडोर में भीड़ नियंत्रण और प्रबंधन की तकनीकों को समझेंगे। ताकि महाकालेश्वर मंदिर में भविष्य में आने वाली भीड़ को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
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