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संघर्ष की मिसाल: दो साल नौकरी, कई असफलताएं… फिर भी नहीं हारे हर्ष जैन, UPSC में हासिल की 412वीं रैंक

07 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
हर्ष जैन UPSC 2026, AIR 412वीं रैंक

हर्ष जैन UPSC 2026, AIR 412वीं रैंक

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

@रिपोर्ट अतुल जैन

शिवपुरी। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के छोटे से कस्बे बामौर कलां से निकले एक युवा ने अपने सपनों को सच कर दिखाया। लगातार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानने वाले हर्ष जैन ने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 412 हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और धैर्य आखिरकार रंग जरूर लाते हैं।


छोटे कस्बे से देश की सबसे कठिन परीक्षा तक…

बामौर कलां के रहने वाले हर्ष जैन बचपन से ही पढ़ाई में तेज माने जाते थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने ही कस्बे के स्कूल से पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए वे जबलपुर पहुंचे, जहां से उन्होंने इंजीनियरिंग (बीई) की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग के दौरान ही उनके मन में देश सेवा का सपना आकार लेने लगा और उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया। यही वह समय था जब उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना है।


नौकरी भी की और सपना भी नहीं छोड़ा

हर्ष के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। ऐसे में उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद करीब दो साल तक आईटी कंपनी इंफोसिस में काम किया। इस नौकरी के जरिए उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी के लिए जरूरी आर्थिक आधार तैयार किया। बाद में उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए नौकरी छोड़ दी और दिल्ली जाकर UPSC की तैयारी में पूरी तरह जुट गए।


लगातार असफलताएं, लेकिन हार नहीं मानी

UPSC की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर्ष को भी इस रास्ते में कई बार निराशा का सामना करना पड़ा। पहले दो प्रयासों में वे परीक्षा पास नहीं कर सके। तीसरे प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं बना पाए। चौथे प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा भी पार नहीं कर पाए। इन लगातार असफलताओं ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान कर दिया था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को फिर से तैयार किया।


परिवार और भाई का भरोसा बना सबसे बड़ी ताकत

जब लगातार असफलताओं के कारण हर्ष का मन टूटने लगा, तब उनके परिवार ने उन्हें संभाला। उनके माता-पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सबसे खास भूमिका उनके छोटे भाई प्रतीक जैन की रही। उन्होंने हर्ष से कहा कि वे चिंता छोड़कर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें, क्योंकि परिवार की जिम्मेदारी वे संभाल लेंगे। भाई के इस विश्वास ने हर्ष को नई ऊर्जा दी और उन्होंने पूरी लगन के साथ तैयारी शुरू कर दी।


पांचवें प्रयास में मिली बड़ी सफलता

लगातार मेहनत और धैर्य का परिणाम आखिरकार सामने आया। पांचवें प्रयास में हर्ष जैन ने UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 412 हासिल कर ली। इस उपलब्धि के बाद उनके परिवार, दोस्तों और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। बामौर कलां और आसपास के इलाकों में लोगों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।


युवाओं के लिए हर्ष का संदेश…

हर्ष जैन का मानना है कि सिविल सेवा जैसी परीक्षा में सफलता पाने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी हैं— स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन और लगातार मेहनत। उनका कहना है कि यदि कोई विद्यार्थी पूरी ईमानदारी से तैयारी करता है और धैर्य बनाए रखता है, तो सफलता देर से सही लेकिन जरूर मिलती है।


बतादें बामौर कलां के हर्ष जैन की कहानी केवल एक सफलता की खबर नहीं है, बल्कि यह धैर्य, संघर्ष और परिवार के भरोसे की प्रेरक मिसाल भी है। उनकी उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि छोटे कस्बों से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का नया स्रोत बन चुकी है।

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