
इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन में उठे एक फैसले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। वंदे मातरम गाने से इनकार का मामला अब प्रदेश की सियासत में गरमा गया है।
क्या है पूरा विवाद, क्यों बढ़ा मामला?
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस की दो महिला पार्षदों ने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया। यहीं से विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते यह मुद्दा स्थानीय स्तर से निकलकर पूरे मध्य प्रदेश की राजनीति में छा गया। अब इस घटना पर प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है…
सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर सीधा हमला
भोपाल में प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत गाने से इनकार करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम ने इसे “कांग्रेस के चरित्र” से जोड़ते हुए कहा कि खुले तौर पर इनकार करना राष्ट्रीय भावना का अपमान है। उन्होंने इस बयान को लेकर सख्त नाराजगी भी जताई।
“देशभक्ति के प्रतीकों का अपमान”—सीएम का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम और “भारत माता की जय” जैसे नारे सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना से जुड़े हैं। उन्होंने याद दिलाया कि हजारों लोगों ने इन नारों के साथ देश के लिए बलिदान दिया है। ऐसे में इनका विरोध करना गलत संदेश देता है और समाज को बांट सकता है।
कांग्रेस नेतृत्व से मांगा जवाब
सीएम मोहन यादव ने इस पूरे मामले पर कांग्रेस से जवाब मांगा है। उन्होंने खासतौर पर जीतू पटवारी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से स्पष्ट रुख रखने को कहा है। उनका कहना है कि कांग्रेस खुद को राष्ट्रवादी बताती है, लेकिन ऐसे मामलों में उसकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
पीएम नरेंद्र मोदी का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने वंदे मातरम के जरिए देश की भावनाओं को जोड़ा है। इसके उलट, उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर अब तक स्पष्ट और मजबूत स्थिति नहीं ले पाई है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

