
भोपाल। अब गांव में भी नौकरी की गारंटी होगी… और वो भी कागजों में नहीं, बल्कि कानून के दम पर। भोपाल में बोलते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री और नीमच जिले की प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने जैसे ही यह बात कही, ग्रामीण भारत के लिए उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विकसित भारत–ग्रामीण आजीविका मिशन गारंटी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गांवों की तकदीर बदलने वाला ऐतिहासिक कानून है।
हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन का पक्का रोजगार
मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि VB-G RAM G अधिनियम 2025 के तहत अब देश के हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। यह प्रावधान पहले की मनरेगा व्यवस्था से कहीं ज्यादा मजबूत है, क्योंकि अब रोजगार को राहत योजना नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास लक्ष्य से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून महात्मा गांधी के उस विचार को आगे बढ़ाता है, जिसमें गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्गों को सम्मानजनक आजीविका देने पर जोर दिया गया था। खास बात यह है कि वन क्षेत्रों में रहने और काम करने वाले परिवारों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार भी दिया जाएगा, जिससे आदिवासी अंचलों को सीधा लाभ मिलेगा।
मनरेगा से आगे की सोच, अब ‘विकसित भारत’ का मॉडल
भूरिया ने बताया कि केंद्र सरकार अब तक मनरेगा पर 11.74 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सरकार ग्रामीण रोजगार को कितनी गंभीरता से लेती है। VB-G RAM G अधिनियम, 2025, पुराने MGNREGA की जगह लेगा, जहां पहले सिर्फ तात्कालिक राहत दी जाती थी, अब रोजगार को ‘विकसित भारत 2047’ के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। मतलब साफ है – अब गांवों में सिर्फ काम नहीं मिलेगा, बल्कि टिकाऊ आजीविका के साधन बनेंगे।
किसानों के हित में 60 दिन का ‘कार्य विराम’
इस नए कानून में किसानों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मंत्री भूरिया ने बताया कि बुवाई और कटाई के समय राज्य सरकारें 60 दिन का ‘कार्य विराम’ घोषित कर सकेंगी। इससे खेती के सीजन में खेतों में मजदूरों की कमी नहीं होगी और न ही ग्रामीण मजदूरों की आय पर असर पड़ेगा। काम को चार बड़ी श्रेणियों में बांटा गया है—
जल संरक्षण और जल सुरक्षा
ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण
आजीविका संपत्तियों का सृजन
जलवायु संरक्षण से जुड़े कार्य
इससे हर गांव की जरूरत के हिसाब से विकास कार्य हो सकेंगे।
साप्ताहिक भुगतान और हाईटेक निगरानी सिस्टम
अब मजदूरी के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नए कानून के तहत मजदूरी का भुगतान हर हफ्ते अनिवार्य कर दिया गया है। अगर भुगतान में देरी होती है, तो मजदूरों को अपने आप मुआवजा मिलेगा। पारदर्शिता के लिए सरकार हाईटेक सिस्टम ला रही है—
बायोमेट्रिक उपस्थिति
जियो-टैगिंग
सैटेलाइट इमेजरी
एआई आधारित निगरानी
हर छह महीने में डिजिटल सबूतों के साथ सोशल ऑडिट भी अनिवार्य होगा, ताकि गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न रहे।
खर्च का नया फॉर्मूला और बेहतर क्रियान्वयन
VB-G RAM G अधिनियम के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रहेगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह 90:10 होगा। बेहतर अमल के लिए प्रशासनिक खर्च की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही, इस योजना को पीएम गति शक्ति और विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से जोड़ा गया है, जिससे गांवों में सड़क, पानी, भवन और दूसरी सुविधाओं का विकास तेज होगा।
गांवों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की पहल
अंत में मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि VB-G RAM G अधिनियम 2025 सिर्फ रोजगार देने की स्कीम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को जवाबदेह, आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता है। यह कानून गांव के हर नागरिक को राष्ट्र निर्माण का सक्रिय भागीदार बनाएगा। इस मौके पर विधायक दिलीप सिंह परिहार, ओमप्रकाश सकलेचा और अनिरुद्ध माधव मारू भी मौजूद रहे।
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