
भोपाल। बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। खजुराहो से सांसद और मध्य प्रदेश बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा यानी वीडी शर्मा को पार्टी ने ‘ऑल सेल्स कोऑर्डिनेटर’ की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके साथ ऋतुराज सिन्हा और विष्णु वर्धन रेड्डी को ज्वाइंट कोऑर्डिनेटर बनाया गया है।
वीडी शर्मा की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले कुछ समय से उनके नाम को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात के बाद इन चर्चाओं को और हवा मिली थी। ऐसे में नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें संगठन की जिम्मेदारी मिलने से एक सवाल खड़ा हुआ है—बीजेपी ने वीडी शर्मा के लिए सरकार से ज्यादा संगठन को प्राथमिकता क्यों दी?
मंत्री पद की चर्चा के बीच संगठन की जिम्मेदारी
वीडी शर्मा के राजनीतिक सफर को देखें तो संगठन उनकी सबसे मजबूत पहचान रही है। मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने करीब पांच साल पार्टी की कमान संभाली। इस दौरान 2023 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव उनके कार्यकाल की दो बड़ी राजनीतिक परीक्षाएं रहे। अब प्रदेश की राजनीति से निकलकर उन्हें राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिली है। इसे महज पद में बदलाव के तौर पर देखना आसान होगा, लेकिन राजनीतिक तौर पर इसका दायरा इससे कहीं बड़ा है।
खास बात यह है कि पार्टी ने उन्हें किसी एक मोर्चे या सीमित विभाग की जिम्मेदारी देने के बजाय सभी Cells के समन्वय से जुड़ी भूमिका दी है। इसका मतलब है कि अब उनका काम अलग-अलग सामाजिक और पेशेवर समूहों तक पार्टी की पहुंच और संगठनात्मक समन्वय से जुड़े ढांचे के साथ होगा।
‘ऑल सेल्स’ की जिम्मेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
बीजेपी का संगठन सिर्फ प्रदेश, जिला, मंडल और बूथ स्तर तक सीमित नहीं है। पार्टी अलग-अलग सामाजिक और पेशेवर समूहों से संपर्क के लिए विभिन्न Cells और विभागों के जरिए भी काम करती है। यही वजह है कि ‘ऑल सेल्स’ की जिम्मेदारी को केवल एक प्रशासनिक पद मानना सही नहीं होगा। राष्ट्रीय स्तर पर इस काम में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े संगठनात्मक नेटवर्क के बीच तालमेल बनाना महत्वपूर्ण होगा। वीडी शर्मा के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी अहम है क्योंकि उनका पुराना राजनीतिक अनुभव संगठन निर्माण और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क से जुड़ा रहा है। छात्र राजनीति से लेकर प्रदेश बीजेपी की कमान तक उन्होंने संगठन के अलग-अलग स्तरों पर काम किया है। यानी पार्टी ने जिस भूमिका के लिए उन्हें चुना है, वह उनकी अब तक की राजनीतिक प्रोफाइल से भी मेल खाती है।
वीडी शर्मा की संगठनकर्ता वाली पहचान
वीडी शर्मा की राजनीति को समझने के लिए उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले के सफर पर नजर डालना जरूरी है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहने के बाद उन्होंने बीजेपी संगठन में भी कई जिम्मेदारियां संभालीं। 2016 से 2020 के बीच वे मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश महामंत्री रहे। फरवरी 2020 में उन्हें मध्य प्रदेश बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उन्होंने जुलाई 2025 तक प्रदेश संगठन का नेतृत्व किया।
प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनकी सबसे बड़ी चुनौती संगठन को चुनावी स्तर पर मजबूत बनाए रखना थी। उनके कार्यकाल में बीजेपी ने 2023 में मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी की और 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों का पूरा श्रेय किसी एक नेता को देना उचित नहीं होगा। चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व, मुख्यमंत्री, उम्मीदवारों, संगठन और बूथ कार्यकर्ताओं की भूमिका होती है। लेकिन यह भी तथ्य है कि इन दोनों बड़े चुनावों के दौरान प्रदेश बीजेपी की कमान वीडी शर्मा के हाथ में थी।
2024 की जीत ने राष्ट्रीय भूमिका का रास्ता खोला?
2024 का लोकसभा चुनाव वीडी शर्मा के संगठनात्मक सफर का अहम पड़ाव रहा। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी 29 सीटें जीत लीं। खुद वीडी शर्मा ने खजुराहो सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। 2024 में उन्होंने 5 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीता। इस जीत ने उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक स्थिति को भी मजबूत किया। हालांकि उनकी राष्ट्रीय भूमिका का आधार सिर्फ चुनावी जीत नहीं है। इसके पीछे संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि राष्ट्रीय टीम में उन्हें मिली नई जिम्मेदारी को उनके पुराने संगठनात्मक ट्रैक रिकॉर्ड से जोड़कर देखा जा रहा है।
खजुराहो से दिल्ली तक बढ़ता राजनीतिक दायरा
वीडी शर्मा के राजनीतिक सफर में एक और बदलाव साफ दिखाई देता है। पहले उनकी राजनीति का मुख्य केंद्र मध्य प्रदेश था। प्रदेश अध्यक्ष रहते उनकी जिम्मेदारी पूरे राज्य के संगठन तक थी। सांसद बनने के बाद खजुराहो और बुंदेलखंड उनके राजनीतिक क्षेत्र का हिस्सा बने। अब राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने के बाद उनका कामकाज का दायरा राज्य की सीमाओं से बाहर जा रहा है। यही इस नियुक्ति का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत भी है।
अब उन्हें अलग-अलग राज्यों और सामाजिक-पेशेवर समूहों से जुड़े संगठनात्मक काम के साथ तालमेल करना होगा। यानी जिस संगठनात्मक अनुभव के आधार पर उन्होंने मध्य प्रदेश में अपनी पहचान बनाई, उसी अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर परखने का मौका उन्हें मिला है।
नई टीम में MP का बढ़ा वजन
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के कई नेताओं को जगह मिली है। वीडी शर्मा के अलावा लाल सिंह आर्य, गजेंद्र सिंह पटेल, कविता पाटीदार, बंसीलाल गुर्जर और आशीष अग्रवाल समेत कई नेताओं को राष्ट्रीय जिम्मेदारियां दी गई हैं। यह मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए भी महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में राज्य में पार्टी का चुनावी प्रदर्शन मजबूत रहा है। 2023 में सत्ता में वापसी और 2024 में सभी लोकसभा सीटें जीतने के बाद राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश के नेताओं की मौजूदगी बढ़ना राजनीतिक तौर पर ध्यान खींचता है।
क्या मंत्री पद की संभावना खत्म हो गई?
यह सवाल अभी भी बना हुआ है। नई जिम्मेदारी को यह मान लेना कि वीडी शर्मा को मंत्री पद की दौड़ से बाहर कर दिया गया है, जल्दबाजी होगी। इसी तरह इसे केंद्र में मंत्री बनने की अगली सीढ़ी मान लेना भी फिलहाल अनुमान ही होगा। प्रधानमंत्री से मुलाकात और उसके बाद राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने की टाइमिंग ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर बढ़ाया है। लेकिन किसी नेता की भविष्य की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष सिर्फ इन घटनाओं के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि बीजेपी ने वीडी शर्मा के लिए राष्ट्रीय संगठन का दरवाजा खोल दिया है।
सांसद के तौर पर भी सक्रिय भूमिका
संगठन की जिम्मेदारी के साथ वीडी शर्मा खजुराहो से सांसद की भूमिका भी निभा रहे हैं। संसद में उनके सवालों का बड़ा हिस्सा खजुराहो, बुंदेलखंड, पर्यटन, कनेक्टिविटी, पानी, कृषि और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर रहा है। इससे उनकी राजनीतिक प्रोफाइल के तीन हिस्से सामने आते हैं—संगठनकर्ता, सांसद और अब राष्ट्रीय पदाधिकारी। इन तीनों भूमिकाओं का संतुलन उनके लिए आगे की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
अब असली परीक्षा राष्ट्रीय स्तर पर होगी
प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर वीडी शर्मा के सामने एक राज्य का संगठन था। अब जिम्मेदारी का दायरा बड़ा है। अलग-अलग राज्यों, सामाजिक समूहों और पेशेवर नेटवर्क से जुड़े Cells के बीच समन्वय करना उनके सामने नई चुनौती होगी। इसलिए उनकी नई जिम्मेदारी को सिर्फ एक पद के तौर पर देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी।
बीजेपी ने उन्हें जिस काम के लिए चुना है, वह उनके संगठनात्मक अनुभव की सीधी परीक्षा भी है। अगर वह राष्ट्रीय स्तर पर Cells के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से सक्रिय करने में सफल रहते हैं, तो इससे उनकी पहचान सिर्फ मध्य प्रदेश के संगठनकर्ता तक सीमित नहीं रहेगी।
मंत्री पद की चर्चाएं अपनी जगह हैं, लेकिन बीजेपी का मौजूदा फैसला एक बात साफ करता है—पार्टी ने वीडी शर्मा की संगठनात्मक क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर आजमाने का फैसला किया है। अब देखना यह होगा कि वह इस जिम्मेदारी को किस तरह अपनी अगली राजनीतिक पारी का आधार बनाते हैं।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

