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युद्ध और गैस संकट की दोहरी मार: मंडियों में औने-पौने दाम पर बिक रहीं सब्जियां, ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान

06 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
युद्ध और गैस संकट की दोहरी मार: मंडियों में औने-पौने दाम पर बिक रहीं सब्जियां, ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंच गया है। सब्जियों की मांग अचानक गिर गई है और किसान मजबूर होकर अपनी उपज औने-पौने दामों में बेच रहे हैं—या फिर फेंकने को मजबूर हैं।


मंडियों में भरमार, लेकिन खरीदार गायब

प्रदेश की मंडियों में गर्मियों की सब्जियों की आवक सामान्य बनी हुई है, लेकिन डिमांड बेहद कमजोर है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि बड़ी मात्रा में बची सब्जियां गोशालाओं में भेजी जा रही हैं, क्योंकि उन्हें बेचने का कोई खरीदार नहीं मिल रहा।


गैस संकट ने तोड़ा बाजार का संतुलन

कमर्शियल LPG की कमी ने होटल, ढाबों और स्ट्रीट फूड कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। जब खाना ही नहीं बन पा रहा, तो सब्जियों की खपत कैसे होगी? यही वजह है कि बाजार में मांग अचानक गिर गई—और इसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ा।


होटल-हॉस्टल बंद, सब्जियों की खपत आधी

भोपाल के होटल कारोबार से जुड़े तेजकुल सिंह पाली के मुताबिक, LPG की कमी के चलते कई छोटे होटल बंद हैं। जो खुले हैं, वे भी कम गैस में बनने वाली सीमित सब्जियां ही खरीद रहे हैं। इससे मंडी में रोजाना पहुंचने वाली उपज खप नहीं पा रही।


7 दिन में ऐसे टूटे सब्जियों के दाम

थोक बाजार में सब्जियों के दामों में तेज गिरावट दर्ज की गई है:


टमाटर: ₹15-20 → ₹8-10


पत्ता गोभी: ₹8-10 → ₹5-8


हरी मिर्च: ₹40-60 → ₹20-40


शिमला मिर्च: ₹30-40 → ₹25-30


भिंडी: ₹30-40 → ₹25-30



यानी किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है—और हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।


ओलावृष्टि ने बढ़ाई मुश्किलें

इधर मौसम की मार ने किसानों की परेशानी दोगुनी कर दी है। मुलताई और आसपास के इलाकों में ओलों की वजह से टमाटर, भिंडी, बैंगन, फूलगोभी की फसल पूरी तरह खराब हो गई। वहीं पालक, धनिया और मैथी जैसी फसलें तो जमीन में ही मिल गईं।


निर्यात ठप, लोकल बाजार पर दबाव

सब्जियों का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। हरिओम खटिक के अनुसार, खाड़ी देशों के लिए भेजी गई खेप समुद्र में फंस गई और खराब हो गई। अब निर्यात बंद होने से पूरा माल स्थानीय बाजार में आ रहा है—जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है।


गोशालाओं में जा रहीं सब्जियां

गायत्री शक्तिपीठ से जुड़े रमेश नागर बताते हैं कि मंडियों में सब्जियां इतनी सस्ती हो गई हैं कि लोग उन्हें पशु आहार के रूप में खरीद रहे हैं। खीरा, लौकी, टमाटर जैसी सब्जियां अब इंसानों से ज्यादा पशुओं के काम आ रही हैं—जो इस संकट की गंभीरता को दिखाता है।


आगे क्या?

एक तरफ युद्ध का असर, दूसरी तरफ मौसम और गैस संकट—तीनों ने मिलकर सब्जी बाजार को हिला दिया है। अगर जल्द हालात नहीं सुधरे, तो किसानों को और बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है—और इसका असर आम आदमी की थाली पर भी देर से जरूर दिखेगा।

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