
विदिशा मेडिकल कॉलेज और एम्स भोपाल के बीच MOU साइन होने से चिकित्सा सेवाओं को विशेषज्ञ मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग मिलने का रास्ता तैयार हुआ है। प्रस्तावित डे-केयर सेंटर के संचालन में एम्स भोपाल अहम भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जूनियर डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल स्टाफ से संवाद किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ बीमारी की रोकथाम और नशामुक्ति पर भी जोर दिया।
डे-केयर सेंटर के संचालन में एम्स की भूमिका
विदिशा मेडिकल कॉलेज में शुरू होने वाले डे-केयर सेंटर को एम्स भोपाल की विशेषज्ञ सहायता मिलेगी। सेंटर के बेहतर संचालन के लिए जरूरी प्रक्रियाओं और मानकों से जुड़ी SOP तैयार करने का काम भी एम्स करेगा।
एम्स भोपाल की टीम समय-समय पर मेडिकल कॉलेज विदिशा का दौरा करेगी। इन विजिट के दौरान व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा।
मरीजों के लिए रेफरल की व्यवस्था
यदि किसी मरीज के उपचार की सुविधा विदिशा मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर एम्स भोपाल भेजकर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इससे उन मरीजों को आगे के इलाज के लिए संस्थागत स्तर पर सहायता मिल सकेगी, जिनकी जरूरत के मुताबिक चिकित्सा सुविधा विदिशा में मौजूद नहीं है।
मेडिकल स्टाफ से शिवराज ने किया आत्मीय संवाद
शिवराज सिंह चौहान ने मेडिकल कॉलेज में काम कर रहे जूनियर डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ और अन्य मेडिकल कर्मियों से बातचीत की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाया और चिकित्सा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की। केंद्रीय मंत्री ने जनसेवा के संकल्प को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बीमारी से बचाव को बताया ज्यादा जरूरी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में इलाज की अपनी अहमियत है, लेकिन बीमारियों की रोकथाम पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए। उन्होंने लोगों को ऐसी जीवनशैली अपनाने की जरूरत बताई, जिससे बीमारी की स्थिति कम से कम बने। उनका जोर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बीमारी होने से पहले बचाव की आदत विकसित करने पर रहा।
नशे के खिलाफ जागरूकता और सख्ती पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने नशे को एक बड़ी सामाजिक चुनौती बताते हुए इसके खिलाफ सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई। उन्होंने विशेष रूप से शराब के बढ़ते नशे को समाज के लिए समस्या बताया।
नशामुक्ति के लिए उन्होंने दो स्तरों पर काम करने की बात कही—
जन-जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करना।
प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई कर नशे के खिलाफ प्रभावी कदम उठाना।
उन्होंने जिले को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।
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