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राखी बांधने पहुंची दिव्यांग बहन की बेटी की पढ़ाई का मंत्री विश्वास सारंग नें उठाया जिम्मा, ट्राई साइकिल भी दिलवाई

01 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
राखी बांधने पहुंची दिव्यांग बहन की बेटी की पढ़ाई का मंत्री विश्वास सारंग नें उठाया जिम्मा, ट्राई साइकिल भी दिलवाई
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव-2026 में वार्ड क्रमांक 78 की निवासी दिव्यांग महिला मोहन बाई अपनी बेटी आयूषी के भविष्य को लेकर मंत्री श्री विश्वास सारंग के पास पहुंचीं। उन्होंने राखी बांधने के बाद बेटी की स्कूल फीस माफ कराने और उसकी आगे की पढ़ाई जारी रखने में सहयोग मांगा।


मंत्री श्री सारंग ने मोहन बाई की परेशानी सुनकर आयूषी की स्कूल फीस माफ कराने की कार्रवाई और उसकी आगे की पढ़ाई पूरी कराने का इंतजाम किया। मोहन बाई के लिए आर्थिक सहायता के साथ उनकी जरूरत को देखते हुए ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने में भी मदद की गई।


राखी बांधने के बाद बेटी के भविष्य की चिंता रखी

महोत्सव में मोहन बाई ने अपने लिए किसी सुविधा की मांग करने के बजाय बेटी आयूषी की शिक्षा को प्राथमिकता दी। उनकी चिंता मुख्य रूप से स्कूल की फीस और पढ़ाई आगे जारी रखने को लेकर थी। मंत्री सारंग की ओर से तत्काल मदद मिलने के बाद मोहन बाई के चेहरे पर राहत और खुशी नजर आई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना की।


एक ही मौके पर शिक्षा और जरूरत दोनों में मदद

मोहन बाई की स्थिति को देखते हुए सहायता केवल आयूषी की पढ़ाई तक सीमित नहीं रही। उन्हें आर्थिक सहयोग दिया गया और आवागमन में सुविधा के लिए ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने में भी मदद की गई। इस घटनाक्रम ने नरेला रक्षाबंधन महोत्सव में भाई-बहन के रिश्ते से जुड़े सहयोग और जिम्मेदारी के भाव को सामने रखा।


18 वर्षों से आयोजित हो रहा नरेला रक्षाबंधन महोत्सव

मंत्री श्री विश्वास सारंग पिछले 18 वर्षों से लगातार हर साल नरेला रक्षाबंधन महोत्सव आयोजित करते आ रहे हैं। इस आयोजन में हर वर्ष बड़ी संख्या में बहनें शामिल होकर उन्हें रक्षासूत्र बांधती हैं। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव को भाई-बहन के बीच विश्वास, सुरक्षा और सहयोग की भावना से जोड़ा गया है। इस वर्ष मोहन बाई और आयूषी से जुड़ा प्रसंग इसी मानवीय पक्ष का उदाहरण बना।


रक्षाबंधन में सामने आया रिश्ते का दूसरा पक्ष

मोहन बाई ने भाई के सामने बेटी के भविष्य की चिंता रखी और उन्हें सहायता मिली। इस प्रसंग ने रक्षाबंधन के उस भाव को सामने रखा, जिसमें राखी के साथ जरूरत के समय साथ खड़े होने की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। आयूषी की शिक्षा को लेकर मिली मदद ने महोत्सव के दौरान मौजूद लोगों के बीच संवेदनशीलता का भाव पैदा किया।

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