
भोपाल। विधानसभा चुनाव में हार के बाद अधिकांश नेता अपने क्षेत्र में कम सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अलग रास्ता चुना। चुनावी पराजय के बावजूद उन्होंने दतिया से दूरी नहीं बनाई और लगातार लोगों के बीच सक्रिय रहकर अपने राजनीतिक जनसंपर्क को बनाए रखा।
इसी दौरान दतिया में विश्व के पहले नवग्रह मंदिर की स्थापना भी उनकी सबसे चर्चित पहलों में शामिल रही। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में जनता के बीच लगातार मौजूदगी और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों ने एक बार फिर उन्हें दतिया उपचुनाव के संभावित प्रमुख चेहरों में ला खड़ा किया है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक उपचुनाव के लिए उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
हार के बाद भी नहीं टूटा जनता से संपर्क
विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया में सक्रिय रहे। जनसंपर्क, सामाजिक कार्यक्रमों और क्षेत्रीय गतिविधियों में उनकी नियमित मौजूदगी ने समर्थकों के बीच उनका राजनीतिक आधार बनाए रखा।
विश्व का पहला नवग्रह मंदिर बना चर्चा का केंद्र
मां पीतांबरा के भक्त माने जाने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा की पहल पर दतिया में विश्व के पहले नवग्रह मंदिर की स्थापना हुई। यह परियोजना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती है और क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बनी।
दतिया में मजबूत राजनीतिक पकड़
डॉ. नरोत्तम मिश्रा पांच बार दतिया से विधायक रह चुके हैं। क्षेत्र में उन्हें 'दादा' के नाम से जाना जाता है और उनका जनाधार अब भी मजबूत माना जाता है।
संगठन के भरोसेमंद रणनीतिकार
शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह मंत्री रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। साल 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम में भी उनकी भूमिका को अहम माना गया था। पार्टी ने कई राज्यों में चुनावी जिम्मेदारी देकर भी उन पर भरोसा जताया।
अब उपचुनाव पर नजर
दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में लिया जा रहा है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा होना बाकी है।
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