
भोपाल। मध्यप्रदेश अब सिर्फ जंगलों और अभयारण्यों का राज्य नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की नई पहचान बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रदेश में पर्यटन विकास, रिजर्व फॉरेस्ट के विस्तार और वन्यजीव संरक्षण की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार इस दिशा में लगातार ऐतिहासिक फैसले ले रही है।
वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की बड़ी पहल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफल बसाहट के बाद अब अगला कदम और भी बड़ा होने जा रहा है। असम के जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश के वनों में बसाने की योजना पर गंभीरता से काम शुरू हो चुका है। इससे न सिर्फ जैव-विविधता को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।
दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से अहम चर्चा
इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर मुख्यमंत्री ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से विस्तार से चर्चा की। बैठक में जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं, तकनीकी पहलुओं और केंद्र-राज्य समन्वय पर विचार-विमर्श किया गया।
28 फरवरी को बोत्सवाना से आएंगे 8 नए चीते
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 28 फरवरी को बोत्सवाना से 8 चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। बैठक में चीतों के पुनर्स्थापन, सुरक्षा व्यवस्था, मॉनिटरिंग सिस्टम और दीर्घकालीन संरक्षण रणनीति पर भी गहन चर्चा हुई। डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता संवर्धन में केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार जताया। वहीं केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री से भी हुई मुलाकात
वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ औद्योगिक विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री सक्रिय नजर आए। डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली स्थित उद्योग भवन में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की। इस दौरान वस्त्र विभाग से जुड़े केंद्र स्तर पर लंबित मामलों पर चर्चा हुई और शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया गया। बैठक में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव सहित मंत्रालय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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