
भोपाल। महिलाओं और बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भोपाल में एक विशेष संवाद आयोजित किया गया। इस बैठक में साइबर अपराधों की रोकथाम, डिजिटल जागरूकता बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदार उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस पहल में मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग, आहान फाउंडेशन और गूगल एक साझा मंच पर आए। कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी भाग लेकर जमीनी अनुभव साझा किए और सामुदायिक स्तर पर डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
डिजिटल सुरक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी बताया
मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग परिसर में आयोजित कार्यक्रम में आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने अनेक अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। उनके अनुसार महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा केवल कानून या तकनीक का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए डिजिटल जागरूकता, समय पर शिकायत दर्ज कराने की संस्कृति और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना जरूरी है। परिवार, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन, तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान और शासन के संयुक्त प्रयासों से ही सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार किया जा सकता है।
'रिस्पॉन्सिबल नेटिजन' कार्यक्रम में साझा हुए अनुभव
कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर भी मौजूद रहे। 'रिस्पॉन्सिबल नेटिजन' कार्यक्रम के तहत आयोजित इस संवाद में महिला एवं बाल कल्याण क्षेत्र में कार्यरत कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए समुदाय स्तर पर डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई।
बच्चों की सुरक्षा और एआई पर गूगल का जोर
गूगल की डायरेक्टर (सर्च एंड जेनरेटिव एआई ट्रस्ट एंड सेफ्टी) स्निग्धा भारद्वाज ने 'चाइल्ड सेफ्टी एंड एआई' विषय पर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास बच्चों और समाज के हितों को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने, ऑनलाइन जोखिमों की पहचान करने और बच्चों के लिए जिम्मेदार डिजिटल वातावरण तैयार करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर दिए व्यावहारिक सुझाव
गूगल के ट्रस्ट एंड सेफ्टी विभाग के समीर ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न मानकों और सुरक्षा उपायों की जानकारी साझा की। आहान फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोनाली पाटणकर ने साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी लिंक, डेटा सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग से जुड़े व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल साक्षरता प्रत्येक नागरिक की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है।
सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम बनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सभी सहभागी स्वयंसेवी संस्थाओं ने महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित, समावेशी और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। बैठक में यह सहमति बनी कि शासन, तकनीकी संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और समाज के सामूहिक प्रयासों से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है और सुरक्षित डिजिटल भारत की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
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