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World Tiger Day 2026: मध्यप्रदेश में बढ़ी बाघों की मौतें, चार महीनों में 29 टाइगर की जान, करंट बना बड़ा खतरा

29 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
World Tiger Day 2026: मध्यप्रदेश में बढ़ी बाघों की मौतें, चार महीनों में 29 टाइगर की जान, करंट बना बड़ा खतरा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। विश्व बाघ दिवस पर मध्यप्रदेश की तस्वीर दो पहलू दिखा रही है। एक ओर राज्य देश में सबसे अधिक बाघों वाला प्रदेश है, वहीं दूसरी ओर बाघों की मौत के मामलों में भी सबसे आगे बना हुआ है।


साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही प्रदेश में 29 बाघों की मौत दर्ज की गई है। इनमें 5 बाघों की जान बिजली के करंट से गई, जिससे वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


चार महीनों में 29 बाघों की मौत

वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 1 जनवरी से 29 अप्रैल 2026 के बीच प्रदेश में 29 टाइगर मॉर्टेलिटी दर्ज हुई।


इनमें प्रमुख कारण रहे—

  1. 5 मौतें बिजली के करंट से

  2. 1 मामले में शिकार की पुष्टि

  3. आपसी संघर्ष

  4. बीमारी

  5. कुएं में गिरना

  6. अन्य प्राकृतिक कारण


करंट से मौत के मामले मंडला, शहडोल, उमरिया और सिवनी वन क्षेत्रों में दर्ज किए गए।


NTCA के आंकड़ों में मध्यप्रदेश सबसे ऊपर

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अनुसार 2012 से 2025 के बीच देशभर में 1,581 बाघों की मौत दर्ज हुई। इनमें अकेले 423 मौतें मध्यप्रदेश में हुईं, जो देश में सबसे अधिक हैं। 


करंट बनता जा रहा सबसे बड़ा मानवीय खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक प्राकृतिक कारणों में क्षेत्रीय संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) से सबसे अधिक मौतें होती हैं, लेकिन मानव गतिविधियों से जुड़े कारणों में बिजली का करंट सबसे गंभीर खतरा बनकर उभरा है।

  • 2025 में करंट से 8 बाघों की मौत

  • 2026 के पहले चार महीनों में ही 5 मौतें

  • इसके अलावा ट्रेन दुर्घटनाएं, सड़क हादसे और शिकार के मामले भी सामने आए हैं।


किन वर्षों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं

NTCA के अनुसार पूरे देश में 2023 सबसे घातक वर्ष रहा, जब 182 बाघों की मौत दर्ज हुई।


मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड इस प्रकार रहा

  • 2023: 45 मौतें

  • 2024: 47 मौतें

  • 2025: 55 मौतें (सबसे अधिक)

  • 2026 (जनवरी–अप्रैल): 29 मौतें


यानी इस वर्ष औसतन हर चार दिन में एक बाघ की जान गई।


जंगल के बाहर भी सुरक्षित नहीं बाघ

NTCA के आंकड़ों के मुताबिक 2012 से अब तक 52.5% मौतें टाइगर रिजर्व के भीतर और 47.5% रिजर्व के बाहर हुई हैं। इसी अवधि में बाघों की खाल और शरीर के अंगों की 80.7% बरामदगी भी टाइगर रिजर्व के बाहर दर्ज की गई।


सर्दियों में बढ़ जाती हैं मौतें

राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक मौतें जनवरी में दर्ज हुईं।


महीनेवार रिकॉर्ड

दिसंबर: 165

जनवरी: 190

फरवरी: 145

मार्च: 138

अप्रैल: 148

मई: 165


विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में बाघों की आवाजाही और क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने से जोखिम भी बढ़ जाता है।


नर बाघों की मौत ज्यादा

2012 से 2025 के NTCA रिकॉर्ड के अनुसार

  • 53.9% मृत बाघ नर थे।

  • 46.1% मादा बाघ थीं।


क्यों बढ़ रही हैं बाघों की मौतें

विशेषज्ञों ने कई प्रमुख कारण बताए हैं—

  1. 2014 से 2022 के बीच देश में बाघों की संख्या 65% बढ़ी।

  2. इसी अवधि में मध्यप्रदेश में 155% वृद्धि दर्ज हुई।

  3. राज्य में बाघों की संख्या 785 से बढ़कर करीब 1000 होने का अनुमान है।

  4. भोजन और क्षेत्र (टेरिटरी) पर दबाव बढ़ने से कई बाघ जंगल से बाहर निकल रहे हैं।

  5. सीमित जंगल, करंट, सड़क और रेल दुर्घटनाएं तथा मानव-बाघ संघर्ष मौतों का जोखिम बढ़ा रहे हैं।


विशेषज्ञ ने सुझाए ये उपाय

वाइल्डलाइफ एक्टविस्ट अजय दुबे का कहना है कि बाघों की मौत रोकने के लिए फील्ड में वाइल्डलाइफ क्राइम अधिकारियों की तैनाती बढ़ाई जानी चाहिए और मुखबिर तंत्र को अधिक सक्रिय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के साथ विश्वास बढ़ाने, बिजली के तार और जहर से होने वाले शिकार पर सख्त कार्रवाई, वन्यजीव अपराधों में प्रभावी कानूनी पैरवी और दोष सिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

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