मंगलवार, 28 जुलाई 2026
Logo
Madhaya Pradesh

ब्रश करते समय युवक की गर्दन की नस फटी, डॉक्टरों ने दुर्लभ 'सर्जरी' से दी नई जिंदगी

05 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Doctors of Dr Bheem Rao Ambedkar hospital

Doctors of Dr Bheem Rao Ambedkar hospital

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने दुर्लभ सर्जरी की गई है। ब्रश करते समय 40 वर्षीय युवक की गर्दन की नस फट गई। कई घंटे के चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की सहायता से फटी हुई कैरोटिड आर्टरी को सावधानीपूर्वक रिपेयर किया गया।

डॉक्टरों ने दुर्लभ 'सर्जरी' से मरीज को नई जिंदगी दी। गर्दन की मुख्य धमनी कैरोटिड आर्टरी के अपने आप फट जाने पर दुर्लभ और जानलेवा स्थिति में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने समय रहते जटिल सर्जरी की। यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ में पहली बार सामने आया है, बल्कि अब तक विश्व मेडिकल जर्नल में ऐसे केवल 10 ही प्रकरण दर्ज हैं।

 

कुछ ही क्षणों में मरीज हो गया बेहोश 

रायपुर निवासी युवक सुबह घर पर दांत साफ कर रहा था। अचानक उसके गले में तेज दर्द हुआ और देखते ही देखते पूरे गर्दन में सूजन आ गई। कुछ ही क्षणों में मरीज बेहोश हो गया। परिजन उसे तत्काल अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर गए। गर्दन के नसों की सीटी एंजियोग्राफी जांच में पता चला कि मरीज की दायीं कैरोटिड आर्टरी फट चुकी है। उसके चारों ओर गुब्बारानुमा संरचना बन गई है, जिसे कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म कहा जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तत्काल हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में में डॉ कृष्ण कांत साहू के पास भेजा गया।


खून के जमाव से धमनी को पहचानना कठिन था 

यह ऑपरेशन अत्यंत जोखिमपूर्ण था। गर्दन में खून के अत्यधिक जमाव के कारण धमनी को पहचानना बेहद कठिन था। जरा सी चूक से मरीज की जान जा सकती थी। ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क में खून का थक्का पहुंचने से लकवा या ब्रेन डेड होने का खतरा था। मरीज और परिजनों को सभी जोखिमों की जानकारी देकर सर्जरी की सहमति ली गई। सर्जरी पूरी तरह सफल रही। राहत की बात यह रही कि मरीज को किसी भी प्रकार का लकवा नहीं हुआ। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।

 

खुद कैरोटिड आर्टरी का फटना अत्यंत दुर्लभ मामला 

सामान्यतः कैरोटिड आर्टरी के फटने की घटनाएं एथेरोस्क्लेरोसिस, ट्रॉमा, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर,संक्रमण या ट्यूमर से ग्रस्त मरीजों में देखी जाती हैं। यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था। अपने आप कैरोटिड आर्टरी का फटना चिकित्सा जगत में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। कैरोटिड आर्टरी गर्दन के दोनों ओर स्थित प्रमुख धमनी होती है, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह सुनिश्चित करती है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर मरीज की जान को तत्काल खतरा होता है।

 

स्वास्थ्य मंत्री ने सर्जरी करने वाली टीम को दी बधाई 

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस दुर्लभ मामले की सफल सर्जरी एवं अभूतपूर्व सफलता पर चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर सहित हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी टीम को बधाई दी है। सर्जरी को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें