
भोपाल में आज से युवा राजनीति की नई दिशा तय करने वाला बड़ा मंच सज गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में शुरू हुए इस सम्मेलन में तीन राज्यों के युवा विधायक जुटे हैं, जहां लोकतंत्र से लेकर भारत 2047 के विजन तक पर गहन चर्चा होगी।
3 राज्यों के युवा विधायक एक मंच पर, बड़ी भागीदारी
राष्ट्रकुल संसदीय संघ के तहत आयोजित इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के युवा विधायक शामिल हो रहे हैं। इसमें मध्य प्रदेश के 37, राजस्थान के 13 और छत्तीसगढ़ के 13 विधायक भाग ले रहे हैं। खास बात यह है कि सभी प्रतिभागी 45 वर्ष से कम उम्र के हैं, जिससे चर्चा में नई सोच और ऊर्जा देखने को मिलेगी।
लोकतंत्र और नागरिक भागीदारी पर पहले दिन फोकस
सम्मेलन के पहले दिन का मुख्य विषय लोकतंत्र को मजबूत करने में युवाओं की भूमिका है। इस सत्र में इस बात पर मंथन होगा कि कैसे युवा विधायक नागरिकों की भागीदारी बढ़ा सकते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और प्रभावी बना सकते हैं—यानी चर्चा सीधे जनता से जुड़ी होगी।
बड़े नेता और विशेषज्ञ करेंगे संबोधित
कार्यक्रम के उद्घाटन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा विशेषज्ञ और शिक्षाविद भी सत्रों में अपने विचार रखेंगे। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु भी युवा विधायकों को संबोधित करेंगे, जिससे चर्चा को अकादमिक दृष्टिकोण भी मिलेगा।
5 सत्रों में होगी गहन चर्चा
दो दिन चलने वाले इस सम्मेलन में कुल 5 सत्र आयोजित किए जाएंगे। पहले दिन 3 सत्र और दूसरे दिन 2 सत्र होंगे। हर सत्र में अलग-अलग विषयों पर गहराई से विचार-विमर्श होगा, जिससे नीतिगत दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
दूसरे दिन ‘विकसित भारत 2047’ पर फोकस
31 मार्च को सम्मेलन का फोकस ‘विकसित भारत 2047’ पर रहेगा। इसमें युवा विधायकों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनकी जिम्मेदारियों पर चर्चा होगी। एमआईटी पुणे के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड भी इस दौरान अपने विचार साझा करेंगे।
समापन में बड़े नेताओं की रहेगी मौजूदगी
सम्मेलन के समापन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश मुख्य अतिथि होंगे। साथ ही संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद रहेंगे। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह मंथन भविष्य की राजनीति में कोई ठोस बदलाव ला पाएगा या नहीं।
बतादें भारत में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट संवाद कम होता है। ऐसे सम्मेलन युवा विधायकों को न सिर्फ सीखने का मौका देते हैं, बल्कि उन्हें नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार भी करते हैं—जो भविष्य की राजनीति के लिए अहम है।
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