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जमीन डेटा सहमति नियम: अब बिना इजाजत नहीं होगा इस्तेमाल, नया डिजिटल सिस्टम देगा पूरा कंट्रोल

28 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
जमीन डेटा सहमति नियम: अब बिना इजाजत नहीं होगा इस्तेमाल, नया डिजिटल सिस्टम देगा पूरा कंट्रोल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। अब आपकी जमीन से जुड़ा डेटा बिना आपकी मंजूरी के इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। सरकार एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म ला रही है, जहां हर नागरिक को अपने डेटा पर पूरा कंट्रोल मिलेगा।


डेटा उपयोग से पहले अनिवार्य होगी डिजिटल सहमति

सरकार के अनुसार अब किसी भी नागरिक की जमीन से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग करने से पहले स्पष्ट अनुमति लेना जरूरी होगा। यह अनुमति डिजिटल माध्यम से ली जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। इस कदम का सीधा असर करोड़ों जमीन मालिकों पर पड़ेगा, जहां अब डेटा पर उनका अधिकार और मजबूत होगा।


कैसा होगा नया डिजिटल प्लेटफॉर्म?

रिपोर्ट के मुताबिक शासन एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है, जो "सहमति प्रबंधक" के रूप में काम करेगा। यह सिस्टम नागरिक और डेटा उपयोग करने वाली एजेंसियों के बीच एक पुल बनेगा। एक विशेषज्ञ एजेंसी को इस सिस्टम के डिजाइन, विकास और संचालन की जिम्मेदारी दी जा रही है, जिससे तकनीकी मजबूती सुनिश्चित की जा सके।


क्यों जरूरी पड़ा यह बदलाव?

वर्तमान में जमीन के रिकॉर्ड डिजिटल रूप में मौजूद हैं, लेकिन डेटा चोरी और दुरुपयोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए सरकार अब 'प्राइवेसी बाय डिजाइन' मॉडल पर काम कर रही है। इसका मतलब है कि सिस्टम की शुरुआत से ही सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे भविष्य में जोखिम कम हो सके।


नागरिकों को क्या मिलेगा फायदा?

इस नई व्यवस्था से आम लोगों को कई बड़े फायदे मिलेंगे:

- बिना अनुमति डेटा शेयरिंग पर रोक: आपकी जानकारी बिना इजाजत किसी तीसरे पक्ष को नहीं दी जाएगी

- पहले मिलेगा नोटिस: कौन सा डेटा और क्यों लिया जा रहा है, इसकी जानकारी पहले दी जाएगी

- आसान शिकायत व्यवस्था: गलत उपयोग की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे


सबसे अहम बात—नागरिक अपनी सहमति कभी भी वापस ले सकेंगे, जिससे नियंत्रण पूरी तरह उनके हाथ में रहेगा।


लेकिन बढ़ रही हैं ये चिंताएं

हालांकि इस सिस्टम को लेकर कुछ आशंकाएं भी सामने आई हैं। पूरा सिस्टम एक निजी एजेंसी द्वारा विकसित और संचालित किया जाएगा, जिससे संवेदनशील डेटा उसके पास रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डेटा लीकेज, चोरी या दुरुपयोग का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। साथ ही, ई-सहमति के नाम पर भ्रमित करके मंजूरी लेने की संभावना भी जताई जा रही है।


प्रशासन का दावा: मजबूत होगी व्यवस्था

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुसार, लैंड और रेवेन्यू रिकॉर्ड सिस्टम को स्थानीय, राज्य और केंद्र स्तर के नियमों के तहत मजबूत किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस नई व्यवस्था से आम नागरिकों के अधिकार बढ़ेंगे और डेटा सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत होगी।


एक नजर में पूरी व्यवस्था

- जमीन डेटा उपयोग से पहले ई-सहमति जरूरी

- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा पूरा कंट्रोल

- डेटा उपयोग की जानकारी पहले दी जाएगी

- कभी भी वापस ले सकेंगे अनुमति

- प्राइवेसी बाय डिजाइन मॉडल पर आधारित सिस्टम

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