
नई दिल्ली। मोदी सरकार की तरफ से इंडियन क्रिमिनल लॉ में कई बड़े बदलाव करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इससे देश को गुलामी की सभी पुरानी निशानियों से छुटकारा मिलेगा। सरकार ने अंग्रेजों के ज़माने के आपराधिक कानूनों में बदलाव की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने 1860 की भारतीय दंड संहिता (IPC), 1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदल कर उनकी जगह देश में नए आपराधिक कानूनों को लाने की तैयारी की है। शुक्रवार को सरकार ने इनमें बदलाव से जुड़े तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए है।
कानूनी ढांचे में बदलाव की ओर कदम
केंद्र की मोदी सरकार ने देश के कानूनी ढांचे में एक बड़े बदलाव की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। मॉनसून सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य विधेयक और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में सुधार के लिए तीन विधेयक भारतीय न्याय संहिता (2023), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (2023) और भारतीय साक्ष्य विधेयक (2023) पेश किए हैं। जिन्हें स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाएगा इसके तहत देश में अब नए कानून लागू किए जाएंगे और कई मामलों में सजा के प्रावधानों को बदला जाएगा।
कई समितियों की सिफारिश के बाद तैयार हुए विधेयक
नए कानून बनने से 533 धाराएं खत्म होंगी। 133 नई धारा शामिल की गई हैं, जबकि 9 धारा को बदल दिया गया है। बता दें इन तीन विधेयकों को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, कानून विश्वविद्यालयों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों आदि सहित कई अन्य के साथ व्यापक चर्चा के बाद तैयार किया गया है। ये विधेयक कई समिति की सिफारिशों के बाद तैयार किया गया है।
मॉब लिंचिंग के लिए नया कानून, राजद्रोह पूरी तरह होगा खत्म
मॉब लिंचिंग के लिए अब नया कानून बनाया जाएगा। केंद्र मॉब लिंचिंग के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान भी करेगा। साथ ही राजद्रोह कानून को पूरी तरह से खत्म किया जाएगा। इसके साथ ही नाबालिग से रेप पर भी मौत की सजा का प्रावधान रखा गया है। नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अपराधों में सजा को प्राथमिकता दी गई है। वहीं, साल 2027 से पहले देश की सभी कोर्ट को कंप्यूटराइज करेंगे। किसी को भी गिरफ्तार करने पर उसके परिवार वालों को सबसे पहसे जानकारी दी जाएगी।
कानूनों में क्या-क्या बदलेगा
नई सीआरपीसी (CRPC) में 356 धाराएं होंगी, जबकि पहले इसमें कुल 511 धाराएं होती थी।
7 साल से ज्यादा की सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक टीम की तरफ से सबूत जुटाए जाएंगे।
देश छोड़कर भागने वाले अपराधियों की अनुपस्थिति में कानूनी प्रक्रिया में पूरी तरह दोषी करार देने का प्रावधान।
अब कोर्ट को सुनवाई पूरी होने के 30 दिन बाद किसी भी सूरत में फैसला सुनाना होगा।
तलाशी-जब्ती को लेकर अब वीडियो बनाना अनिवार्य होगा।
गुनाह किसी भी इलाके में हुआ हो, लेकिन एफआईआर देश के किसी भी हिस्से में दर्ज की जा सकेगीम
90 दिनों के अंदर चार्जेशीट दाखिल करनी होगी और 180 दिनों के अंदर हर हाल में जांच समाप्त की जाएगी।
लव जिहाद पर कार्रवाई के लिए पहचान बदलकर यौन शोषण करने वाले को सजा का प्रावधान होगा।
नाबालिग बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार की सूरत में मृत्यु दंड का प्रावधान होगा।
बच्चों और महिलाओं साथ अपराध के मामले में 10 वर्ष तक की सजा।
भारतीय साक्ष्य कानून (IEA) 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 लेगा।
नई क्रिमिनल केटेगरी
इन बदलावों में मॉब लिंचिंग और नाबालिगों से बलात्कार जैसे अपराधों के लिए सजा-ए-मौत और राजद्रोह के बजाय "एकता को खतरे में डालने" का एक नई क्रिमिनल केटेगरी शामिल किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में तीन विधेयक पेश करते हुए कहा कि 1860 की भारतीय दंड संहिता को भारतीय न्याय संहिता द्वारा चेंज किया जाएगा। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेगी। तीनों को समीक्षा के लिए स्थायी समिति के पास भेजा गया है।
राजद्रोह कानून की जगह धारा 155
संशोधित कानूनों में अलगाव, सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियों, अलगाववादी गतिविधियों या भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों पर एक नया अपराध जोड़ा गया है। अब राजद्रोह कानून का स्वरूप बदलते हुए इसे भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों के लिए धारा 150 द्वारा बदल दिया गया है।
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