
डेस्क रिपोर्टर
News World Deskनई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। आज से ठीक पांच साल पहले 8 नंवबर 2016 को नोटबंदी का बड़ा फैसला लिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित कर 500 और 1000 रूपये के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। सरकार का यह फैसला मुख्य रूप से काले धन पर लगाम लगाने के मकसद से लिया गया था। दावा यह भी किया गया था इससे नक्सलवाद की कमर टूट जाएगी। इसी के चलते पूरे देश का समर्थन प्रधानमंत्री मोदी को मिला था। अब सवाल यह उठता है कि मोदी के नोटबंदी करने से देश को क्या फायदा मिला? फायदा मिला भी या नुकसान हुआ? तो चलिए समझते नोटबंदी से क्या फायदा हुआ और क्या नुकसान।
डिजिटल इंडिया बनाने में मिली मदद
इस बात में कोई दो मत नहीं कि भारत में नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला। डिजिटल इंडिया के माध्यम से डिजिटल पेमेंट को बहुत प्रचारित किया गया। उस दौरान लोगों ने नोटबंदी के इस फैसले को भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक भी कहा था।
70 फीसदी बढ़ा करंसी सर्कुलेशन
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 4 नवंबर 2016 को 17.74 लाख करोड़ रुपए के नोट बाजार में चलन में थे, वहीं 29 अक्टूबर 2021 को यह संख्या बढ़ कर 29.17 लाख करोड़ रुपए हो गई। 30 अक्टूबर 2020 तक चलन में 26.88 लाख करोड़ रुपए के नोट थे। 29 अक्टूबर 2021 तक इसमें 228963 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई। वहीं पिछले साल 30 अक्टूबर 2020 तक यह आंकड़ा बढ़ कर 457059 करोड़ रुपए हो गया। इस हिसाब से पिछले 5 सालों में करंसी का सर्कुलेश 70 फीसदी तक बढ़ा।
कितना मिला काल धन
सरकार का मानना था कि नोटबंदी से काले धन पर लगाम लगेगा। नोटबंदी तो सरकार ने कर दी, लेकिन जिस मकसद के साथ कि थी वह पूरा नहीं हुआ। रिजर्व बैंक ने बात की नोटबंदी के बाद 99% एक हजार रुपए के नोट बैकिंग सिस्टम में वापस आ गए। मतलब 90 से 95 फीसदी 500 रुपए के नोट भी बैकिंग सिस्टम में वापस पहुंच गए होंगे।
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