
नई दिल्ली। AAP Rajya Sabha Split ने देश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने BJP में शामिल होने का ऐलान किया है। इस फैसले ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।
राघव चड्ढा का ऐलान, 7 सांसदों ने लिया फैसला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में Raghav Chadha ने बताया कि पार्टी के दो-तिहाई सांसद उनके साथ हैं। इनमें संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और संजीव अरोड़ा जैसे नाम शामिल हैं। यह संख्या दलबदल कानून के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है—और यही इस फैसले को कानूनी मजबूती देती है।
‘गलत पार्टी में सही आदमी था’—चड्ढा का बड़ा बयान
Raghav Chadha ने कहा कि उन्हें लंबे समय से महसूस हो रहा था कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के प्रावधानों के तहत वे खुद को BJP में विलय करने जा रहे हैं। यह बयान सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर गहरे असंतोष की ओर भी इशारा करता है—जिसकी चर्चा पहले से थी।
ED रेड और राजनीतिक घटनाओं के बीच बढ़ी हलचल
बताया जा रहा है कि सांसद अशोक मित्तल के घर 15 अप्रैल को ED की छापेमारी भी हुई थी। इसके बाद से पार्टी के भीतर हलचल और तेज हो गई थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मित्तल और संदीप पाठक की मौजूदगी ने इस फैसले को और ज्यादा मजबूत संकेत दे दिए हैं—और कई नए सवाल भी खड़े किए हैं।
पहले से मिल रहे थे संकेत, राघव की दूरी चर्चा में
पिछले कुछ समय से Raghav Chadha की पार्टी से दूरी लगातार चर्चा में थी। दिल्ली चुनाव में हार, केजरीवाल की गिरफ्तारी और बाद में बरी होने जैसे बड़े मौकों पर भी वे सक्रिय नजर नहीं आए। यहां तक कि सोशल मीडिया से पार्टी से जुड़े संकेत भी कम होने लगे थे—जो अब इस बड़े फैसले की पृष्ठभूमि बनते दिख रहे हैं।
दलबदल कानून से बचाव का दावा
चड्ढा ने कहा कि चूंकि दो-तिहाई सांसद इस फैसले में शामिल हैं, इसलिए दलबदल कानून लागू नहीं होगा। यह तर्क इस पूरे घटनाक्रम को कानूनी रूप से सुरक्षित बनाने की कोशिश माना जा रहा है—लेकिन क्या यह पूरी तरह विवाद से बचा पाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
यह फैसला AAP के लिए बड़ा झटका और BJP के लिए संभावित बढ़त माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह बदलाव संसद की राजनीति में बड़ा असर डालेगा और क्या AAP इस नुकसान की भरपाई कर पाएगी। आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
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