
नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। सियासी हलकों में इसे 2023 के चुनावी मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है। पक्ष हो या विपक्ष दोनों ही अपने-अपने तरीके से सवाल उठा रहे हैं। बीजेपी इसे मुस्लिम महिलाओं के हित में एक बड़े बदलाव के तौर पर देख रही है। अल्पसंख्यक समाज के अपने ही तर्क हैं। इन सब के बीच एक बड़ा सवाल ये है की आखिर इस समय इस पर इतनी बहस क्यों हो रही है।
आपको बता दें लॉ कमीशन ने धार्मिक संगठनों और जनता से UCC पर राय मांगी है। ऐसे में धार्मिक संगठन भी UCC के पक्ष-विपक्ष में अपनी प्रतिक्रियाए दे रहे हैं। इससे पहले पीएम मोदी ने कहा था कि संविधान में भी सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार का जिक्र किया गया है। ऐसे में बीजेपी ने तय किया है कि वो तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति के बजाए संतुष्टिकरण के रास्ते पर चलेगी। पीएम मोदी के इस बयान के बाद सियासत पूरी तरह से गर्म है, आखिर क्या है UCC जिस पर देश में इतना हंगामा मचा हुआ है।
UCC क्या है?
समान नागरिक संहिता एक देश एक कानून की विचारधार पर आधारित है।
यूसीसी के अंतर्गत देश के सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक ही कानून लागू किए जाना है।
UCC में संपत्ति के अधिग्रहण और संचालन, विवाह, तलाक और गोद लेना आदि को लेकर सभी के लिए एक समान कानून ।
गोवा एकमात्र ऐसा राज्यि है जहां UCC लागू है।
इसे गोवा सिविल कोड के नाम से भी जाना जाता है।
गोवा में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समेत सभी धर्म और जातियों के लिए एक ही फैमिली लॉ है।
इस कानून के तहत गोवा में कोई भी ट्रिपल तलाक नहीं दे सकता है।
शादी का रजिस्ट्रेशन कराया जाना जरूरी है, संपत्ति पर पति-पत्नी का समान अधिकार है।
अनुच्छेद 14, समानता के अधिकार की बात करता है
अनुच्छेद 14 कहता है एक वर्ग के अंदर जितने लोग एक समान हैं, उनके ऊपर एक कानून हो।
संविधान के अनुच्छेद 44 के भाग- 4 में यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा है।
राज्य, देशभर में नागरिकों के लिए एक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कराने का प्रयास करेगा।
ऐसा नहीं है की विधि आयोग ने इसपर पहली बार राय मांगी है। इससे पहले भी 2016 में राय मांगी थी और 2018 में इसकी रिपोर्ट तैयार की और कहा की भारत में UCC की जरूरत नहीं है। समान नागरिक कानून का जिक्र पहली बार 1835 में ब्रिटिश काल में किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद-44 में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की बात कही गई है। समान नागरिक संहिता बीजेपी के मुख्या तीन एजेंडों में शामिल रहा है। इसमें पहला जम्मूक-कश्मीिर से अनुच्छेुद-370 को हटाना था। दूसरा, अयोध्याा में राममंदिर का निर्माण कराना था। इन दोनों एजेंडा का काम खत्मि करने के बाद अब बीजेपी UCC को लागू करने के लिए अपना जोर लगा रही है। अगर हम दुनिया की बात करें तो, ऐसे तमाम देश हैं जहां ये लागू है। अमेरिका, आयरलैंड, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्किये, इंडोनेशिया, सूडान, मिस्र जैसे तमाम देशों के नाम शामिल हैं। यूरोप के कई ऐसे देश हैं, जो एक धर्मनिरपेक्ष कानून को मानते हैं, वहीं इस्लामिक देशों में शरिया कानून को मानते हैं।
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