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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे हुए रिहा, कांग्रेस ने जताया ऐतराज

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे हुए रिहा, कांग्रेस ने जताया ऐतराज

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे हुए रिहा, कांग्रेस ने जताया ऐतराज

Sandeep Sinha
डेस्क रिपोर्टर
Sandeep Sinha

नई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में शामिल 6 दोषियों को रिहा कर दिया है। इसी साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी एजी पेरारिवलन को आर्टिकल 142 का हवाला देते हुए रिहा किया था। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि जिस नियम के तहत एजी पेरारिवलन को रिहाई दी गई थी, वो इस मामले में दोषी पाए गए अन्य पर भी लागू होती है। ये सभी आरोपी करीब 31 साल से जेल में बंद थे। 


आपको बता दे, 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनावी रैली के दौरान एक धनु नाम की आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी मारे गए थे। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें पेरारिवलन, मुरुगन, संथन, रविचंद्रन, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और नलिनी श्रीहरन शामिल थे। 1998 में टाडा अदालत ने पेरारिवलन, मुरुगन, संथन और नलिनी को मौत की सजा सुनाई थी। 


1999 में सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा। 2014 में इसे आजीवन कारावास में बदल दिया गया। 

2008 में जब जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं, तो उन्होंने कैबिनेट से सातों दोषियों की रिहाई के लिए प्रस्ताव पास किया। जिसे राज्यपाल को भेजा गया था। राज्यपाल ने उसे राष्ट्रपति के पास भेजा। तब से ये मामला लंबित था। 2018 में फिर से तमिलनाडु सरकार ने दोषियों की रिहाई के लिए प्रस्ताव पास करके राज्यपाल के पास भेजा था। इस बीच दोषी पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसी साल मई में पेरारिवलन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अनुच्छेद 142 का हवाला देते हुए रिहा कर दिया। इसके बाद अन्य छह दोषियों ने भी कोर्ट में गुहार लगाई थी। 


वहीं कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने इस फैसले पर ऐतराज जताते हुए कहा है, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को समय से पहले रिहा करने का उच्चतम न्यायालय का फैसला पूरी तरह अस्वीकार्य औ्रर दोषपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस फैसले की आलोचना करती है। जयराम रमेश ने यह भी कहा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर भारत की भावना के अनुरूप कदम नहीं उठाया है।

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