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सदन में बोले कृषि मंत्री, 'आंदोलन में मरने वाले किसानोें का हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं'

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सदन में बोले कृषि मंत्री, 'आंदोलन में मरने वाले किसानोें का हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं'
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डेस्क रिपोर्टर
नई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को लोकसभा में लिखित जवाब देते सदन को बताया कि सरकार के पास कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मरने वाले किसानों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। विपक्ष की और से मांग की गई है कि मृतक किसानों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चूंकि सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है, ऐसे में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का कोई सवाल नहीं उठता।

नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन को बताया कि सरकार आंदोलन कर रहें किसानों से बातचीत कर रही है, ताकि आंदोलन को शीघ्र ही समाप्त किया जाए। सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच 11 स्तर पर बातचीत भी हो चुकी है।

किसान संगठन का दावा 700 से ज्यादा मौतें हुई
किसान संगठनों से जुडे़ नेता लंबे समय से यह दावा करते आ रहें हैं कि गाजीपुर सीमा, सिंधु और टिकरी बॉर्डर पर कृषि कानून का विरोध करने वाले 700 से ज्यादा किसान अपनी जान गंवाा चुके है। मौतें अस्वस्थता, खराब मौसम और आत्महत्या के कारण हुई हैं। किसान संगठन अपनी शर्तो के मुताबिक मुआवजा देने की मांग कर रहें हैं।

आंदोलन अभी भी जारी
सरकार ने तीनों कृषि कानूनों भले ही वापस ले लिया हो लेकिन किसान संगठन अभी भी अपनी मांगो को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसान नेताओं की मांग है कि MSP गांरटी कानून बने। आंदोलन के दौरान जिन किसानों पर मुकदमें दर्ज किए है उन्हें वापस लिया जाए और जिन किसानों की मौत हुई है उनको मुआवजा दिया जाए।

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