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डेस्क रिपोर्टर
मुंबई, न्यूज वर्ल्ड डेस्क। टाटा ने आधिकारिक तौर पर गुरुवार को एअर इंडिया को टेक ओवर कर लिया। एअर इंडिया के हैंड ओवर से पहले टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन पीएम नरेन्द्र मोदी से मिले। चंद्रशेखरन ने कहा कि एअर इंडिया टाटा ग्रुप के पास आने से बहुत खुश हैं। 1.2 लाख करोड़ रुपये की देश की एविएशन इंडस्ट्री के लिए इस साल बड़ा बदलाव हुआ है। सरकारी कंपनी 69 साल बाद 27 जनवरी 2022 को प्राइवेट हो गई। एअर इंडिया को टेक ओवर करने के बाद टाटा देश की दूसरी बड़ी एयरलाइन बन गई है। टाटा ने एअर इंडिया को 18 हजार करोड़ रुपये में खरीदा है। साथ ही उसे एअर इंडिया का 26 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज भी चुकाना है।
स्टेट बैंक ने कहा एअस्टेर इंडिया को जितना लोन चाहिए हम देंगे
देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ने कहा कि वह बैंकों के समूह के साथ किसी भी तरह के लोन की जरुरत के लिए तैयार हैं। स्टेट बैंक ने कहा कि वह एअर इंडिया को जितनी भी जरुरत होगी,वर्किंग कैपिटल और अन्य के लिए लोन देने के लिए तैयार हैं।
टाटा एयरलाइंस को वर्ल्ड क्लास बनाएंगे : चंद्रशेखरन
टाटा संस के चेयरमेन चंद्रशेखरन ने कहा कि वे इस डील से काफी खुश हैं। अब एयरइंडिया टाटा ग्रुप के पास आ चुकी है। हम अब एक वर्ल्ड क्लास की एयरलाइंस बनाने के लिए काम करेंगे। टाटा ने लाइट सेवाओं के लिए संदीप वर्मा और मेघा सिंघानिया का नाम तय किया गया है। रतन टाटा की ओर से एक रिकार्डेड ऑडियो जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि यात्रियों का एक मेहमान की तरह स्वागत किया जाएगा।
एविएशन मिनिस्टर सिंधिया ने दी बधाई
विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि नए मालिक को बधाई। मुझे विश्वास है कि एयरलाइंस नए विंग के तहत चमकेगी। टाटा ग्रुप महाराजा की खोई हुई चमक को प्राप्त करेगा। शुरुआती फोक्स में एअर इंडिया के समय पर प्रदर्शन को लेकर काम किया जाएगा।
एअर इंडिया एक दशक से भारी नुकसान झेल रही थी
एअर इंडिया पिछले एक दशक के दौरान भारी नुकसा झेल रही थी। इस पर 31 मार्च 2020 तक 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था। एअर इंडिया को 2020-21 वित्तीय वर्ष में 7 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हुआ था।
एअर इंडिया को पटरी पर लाना टाटा के सामने बड़ी चुनौती
टाटा के सामने सबसे बड़ी चुनौती एअर इंडिया को घाटे से उबारकर फायदे की कंपनी बनाना है। पिछले एक दशक के दौरान एअर इंडिया ने नए इंडियन एविएशन मार्केट में अपना हिस्सा तेजी से गंवाया है। एअर इंडिया अभी इँडियन एविएशन मार्केट में 11 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर इंडिगो जिसकी 48 फीसदी हिस्सेदारी है और दूसरे नंबर पर स्पाइसजेट जिसकी 16 फीसदी हिस्सेदारी है वह है। टाटा की सामने सबसे बड़ी चुनौती इन प्राइवेट कंपनियों की प्रतिस्पर्धा से निपटने की है साथ ही एअर इंडिया को टॉप पर पहुंचाने की है। वैसे रतन टाटा इन तमाम चुनौतियों पर पार पाने के हुनर जानते हैं यही कारण है कि वे इस डील के काफी खुश है और उनका दिली लगाव भी एअर इंडिया से है क्योंकि 69 साल बाद इसकी घर वापसी हुई है।
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