
नई दिल्ली। देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन चल रहा है। यह अधिवेशन कल यानी 17 फरवरी से शुरू हुआ था, जो कि आज यानी 18 फरवरी 2024 को खत्म हो जाएगा। दो दिवदिवसीय इस अधिवेशन में देश भर से करीब 10,000 कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दावा किया है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर से मोदी सरकार बनना तय है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में आतंकवाद और नक्सलवाद अंतिम सांसे गिन रहा है। मोदी के अगले कार्यकाल में देश से आंतकवाद औ नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा।
शाह ने आगे कहा कि मोदी के अगले कार्यकाल में देश से आंतकवाद और नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा। अमित शाह ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस कार्यकाल में हुए घोटालों को गिनाते हुए कहा कि देश में भ्रष्टाचार की जननी कांग्रेस पार्टी है।
आदिवासी और दलितों को पीएम मोदी ने दिया असली हव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से भ्रष्टाचार और जातिवाद की राजनीति को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनके विपरीत, पीएम मोदी ने दलित, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों को उनका असली हक दिया। शाह ने भारतीय गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि उनकी राजनीति भ्रष्टाचार और वंशवाद की है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग अपनी पार्टी के अंदर लोकतंत्र को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं। वो लोग भारत में लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर सकते। राहुल गांधी के नेतृत्व में, एक वंशवादी गठबंधन है।
75 साल, 22 लोकसभा चुनाव और 22 सरकारें
भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि 75 साल में इस देश ने 17 लोकसभा चुनाव, 22 सरकारें, 15 प्रधानमंत्री देखें हैं। देश में जितनी सरकारें आईं सबने समय के साथ विकास करने का काम किया... लेकिन समग्रता से हर क्षेत्र का, हर व्यक्ति का विकास सिर्फ PM मोदी के 10 साल के कार्यकाल में हुआ है। शाह ने कहा कि INDI गठबंधन और कांग्रेस पार्टी इस देश के लोकतंत्र को खत्म कर रही है। उन्होंने देश के लोकतंत्र को भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टिकरण, जातिवाद से रंग दिया है। परिवारवादी पार्टियां इस तरह की लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं करने में लगी रही कि कभी भी जनमत स्वतंत्र रूप से उभर कर न आए।
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