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अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने, जुलाई से तनाव जारी, ITBP DG के बयान पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

23 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने, जुलाई से तनाव जारी, ITBP DG के बयान पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में भारत और चीन के सैनिकों के बीच जुलाई के अंत से तनाव बना हुआ है। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के मुताबिक, असाफिला और माजा इलाके में कई बार दोनों देशों के जवान आमने-सामने आए और टकराव की स्थिति बनी।


सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई है। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब घटनाएं जुलाई से हो रही थीं, तो देश को इसकी जानकारी अक्टूबर में क्यों मिली।


अरुणाचल में जुलाई से जारी है तनाव, सीमा पर बढ़ाई गई तैनाती

ITBP के DG शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह में सीमा की स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा क्षेत्रों में जुलाई के अंत से तनाव बना हुआ है।


उनके अनुसार, भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पिछले कुछ महीनों में कई बार आमना-सामना हुआ। कुछ स्थानों पर हालात टकराव तक पहुंच गए और तनाव अब भी जारी है। भारत ने जवाब में सीमा पर अपनी तैनाती बढ़ाई है।


तीन उच्चस्तरीय बैठकें, फिर भी नहीं बदले हालात

शत्रुजीत कपूर ने बताया कि जुलाई से अब तक भारत और चीन के बीच तीन स्तरों पर बातचीत हो चुकी है। इनमें वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC), विशेष प्रतिनिधि वार्ता और कोर कमांडर स्तर की बैठक शामिल हैं।


कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संपर्क के बावजूद सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं हुई है। सितंबर में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी भारत आए थे।


ड्रोन और भूमिगत शेल्टर पर ITBP का फोकस

सीमा पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों को लेकर ITBP अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। शत्रुजीत कपूर ने कहा कि ड्रोन के इस्तेमाल ने पारंपरिक युद्ध के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव किया है।


उन्होंने बताया कि ITBP ड्रोन विकसित करने के साथ दुश्मन के ड्रोन से निपटने की क्षमता भी बढ़ा रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास अपने संसाधनों की सुरक्षा के लिए बल भूमिगत शेल्टर बनाने पर भी काम कर रहा है।


जयराम रमेश बोले- चीन को दी गई रियायतों की कीमत चुका रहा भारत

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन नीति पर सवाल उठाए।


रमेश ने 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री की ओर से चीन को दी गई कथित क्लीन चिट का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की चीन को लेकर रियायतें जारी रहने के बीच ITBP DG ने PLA के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं में बल के प्रदर्शन की सराहना की है।


जेबी माथेर ने पूछा- जुलाई की घटनाओं की जानकारी अक्टूबर में क्यों मिली?

कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि ITBP महानिदेशक के बयान से पता चलता है कि सीमा पर ये घटनाएं जुलाई से हो रही थीं, लेकिन देश को इनके बारे में अक्टूबर में जानकारी मिली।


माथेर ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार ने अब तक इस विषय पर बयान क्यों नहीं दिया है।


गलवान घाटी संघर्ष की याद, 20 भारतीय सैनिक हुए थे शहीद

भारत-चीन सीमा पर मौजूदा तनाव के बीच वर्ष 2020 की घटनाओं का भी संदर्भ सामने आया है। 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में चीन ने सैन्य अभ्यास के बहाने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई थी। इसके बाद कई जगह घुसपैठ की घटनाएं हुई थीं।


भारत ने भी संबंधित क्षेत्र में चीन के बराबर संख्या में सैनिक तैनात किए। तनाव बढ़ने पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी हुई।


इसी दौरान 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें करीब 60 चीनी जवानों के मारे जाने की बात कही गई।


अरुणाचल प्रदेश पर चीन क्यों जताता है दावा?

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। चीन राज्य के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे 'जांगनान' यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है।


अपने दावे को आगे बढ़ाने के लिए चीन वर्ष 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के चीनी नाम जारी कर चुका है। वर्ष 2023 में 11 स्थानों और 2024 में करीब 30 स्थानों के नाम जारी किए गए थे।


भारत लगातार चीन की इस कार्रवाई का विरोध करता रहा है और अरुणाचल प्रदेश पर अपने अधिकार को लेकर अपना रुख स्पष्ट करता रहा है।

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