
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिमांड सोमवार को समाप्त हो गई। दिल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद सोमवार शाम को श्री केजरीवाल को तिहाड़ जेल ले जाया गया। उन्हें तिहाड़ के जेल नंबर 2 में रखा जाएगा। अब यह प्रश्न उठता है कि तिहाड़ पहुंचने के बाद क्या वे जेल से सरकार चलाएंगे या फिर सत्ता की कमान AAP कार्यकर्ताओं के बीच सुनीता भाभी के नाम से लोकप्रिय सुनीता भाभी चलाएंगे। आइए जानते हैं इससे जुड़े नियम और कानून।
क्या जेल से सरकार चला सकते हैं केजरीवाल?
निश्चित रूप से, देश के कानून के अनुसार, यदि केजरीवाल चाहें तो जेल से भी सरकार चला सकते हैं। परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर, एक मुख्यमंत्री जेल में रहते हुए और कानूनी कार्यवाही का सामना करते हुए भी पद पर बना रह सकता है। हालांकि, उसे अपने मुख्यमंत्री पद से जुड़े सभी दायित्वों का निवर्हन जेल मैन्युअल के नियमों का पालन करते हुए करना होगा। ऐसे में इन नियमों का पालन करते हुए सरकार चलाना बेहद कठिन कार्य होगा।
जेल की किन पाबंदियों से नहीं बने रह सकेंगे पद पर
तिहाड़ जेल में मुलाकातियों के लिए कड़े नियम हैं। किसी भी कैदी को बाहर से आने वाले किसी शख्स से व्यक्तिगत मुलाकात करने की अनुमति नहीं है। मुलाकातियों और कैदियों के बीच एक शीशे की दीवार होती है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर आदि का इस्तेमाल नहीं हो सकता।
क्या केजरीवाल अपनी पत्नी को ट्रांसफर कर सकते हैं सीएम पोस्ट?
नियमों के अनुसार, श्री केजरीवाल सीधे अपना पद अपनी पत्नी को हस्तांतरित नहीं कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। हालाँकि, यदि श्रीमती सुनीता केजरीवाल को AAP विधायक दल का नेता चुना जाता है, तो वे मुख्यमंत्री बन सकती हैं। हालाँकि, एक चुनौती यह है कि श्रीमती केजरीवाल वर्तमान में विधानसभा की सदस्य नहीं हैं। इसलिए, यदि वे मुख्यमंत्री बनती हैं, तो उन्हें पद ग्रहण करने के छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना होगा। उन्हें उपचुनाव लड़कर जीत हासिल करनी होगी। इस छह महीने की समय सीमा के दौरान, राज्यपाल उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कुछ अतिरिक्त समय दे सकते हैं।
क्या होता है जब कोई मुख्यमंत्री गिरफ्तार किया जाता है।
यदि किसी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया जाता है या जेल में डाल दिया जाता है, तो उन्हें सरकार के दिन-प्रतिदिन के कार्यों को पूरा करने के लिए अपनी जिम्मेदारियां किसी उप मुख्यमंत्री या किसी अन्य नामित अधिकारी को सौंपनी पड़ सकती है। इसके साथ ही उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में भाग लेने, सरकारी अधिकारियों के साथ संवाद करने और जनता के साथ बातचीत करने के लिए भी वैसी छूट नहीं दी जा सकती जैसा कि जेल से बाहर रहने वाले किसी मुख्यमंत्री को मिलती है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि यदि मुख्यमंत्री गिरफ्तार हो जाते हैं और उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां किसी अन्य को नहीं सौंपी हैं, तो सरकार का कामकाज प्रभावित होगा।
क्या केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाया जा सकता है?
नहीं, फिलहाल इसकी कोई संभावना नहीं है। ऐसा इसलिए है कि केजरीवाल के खिलाफ अभी सिर्फ आरोप लगे हैं। मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है। हालांकि, अगर केजरीवाल के खिलाफ दोष सिद्ध हो जाता है तो वह अपने पद पर नहीं बने रह सकेंगे। यदि किसी मुख्यमंत्री को किसी आपराधिक अपराध का दोषी ठहराया जाता है और जेल की सजा सुनाई जाती है, तो उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुसार सरकारी पद संभालने से अयोग्य ठहराया जा सकता है। ऐसे सजायफ्ता लोकसभा या विधानसभा का चुनाव भी नहीं लड़ सकते हैं।
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