
कोलकाता। Bengal Voting 92% ने राज्य की राजनीति को हिला दिया है। पहले चरण की 152 सीटों पर 92.88% रिकॉर्ड मतदान ने साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला बेहद कांटे का है। अब सबसे बड़ा सवाल—क्या यह लहर Mamata Banerjee को फायदा देगी या भाजपा के लिए मौका बनेगी?
रिकॉर्ड टूटा, 10% ज्यादा वोटिंग ने बदला समीकरण
इस बार मतदान पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 10% ज्यादा रहा। साल 2021 में 83.2% वोटिंग हुई थी, जबकि अब यह बढ़कर 92.88% तक पहुंच गई है। आजादी के बाद पहली बार इतना ज्यादा मतदान दर्ज हुआ है, जिसने चुनाव को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है—और यहीं से असली गणित शुरू होता है।
महिलाओं ने मारी बाजी, 90% से ज्यादा भागीदारी
इस चुनाव में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिला वोटिंग 92.69% रही, जबकि पुरुषों की भागीदारी 90.92% दर्ज की गई। यह ट्रेंड बताता है कि महिला वोटर इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं—और यही फैक्टर रिजल्ट को पलट भी सकता है।
जिलों में भी रिकॉर्ड, कई जगह 94% तक वोटिंग
राज्य के 16 जिलों में से 12 जिलों में 90% से ज्यादा मतदान हुआ। सबसे आगे दक्षिण दिनाजपुर (94.4%), फिर कूच बिहार (94%), बीरभूम (93.2%), जलपाईगुड़ी (92.7%) और मुर्शिदाबाद (93%) रहे। यह दिखाता है कि वोटिंग हर क्षेत्र में बराबर रही—जो किसी एक पार्टी के पक्ष में स्पष्ट संकेत नहीं देती।
TMC vs BJP: किसे मिलेगा फायदा?
विश्लेषकों के मुताबिक इस बार वोटिंग किसी एक वर्ग या इलाके तक सीमित नहीं रही। हिंदू बहुल और मुस्लिम बहुल—दोनों क्षेत्रों में भारी मतदान हुआ है। भाजपा को उम्मीद है कि ध्रुवीकरण और राष्ट्रीय मुद्दे फायदा देंगे, जबकि Mamata Banerjee की टीएमसी को भरोसा है कि महिला, ग्रामीण और अल्पसंख्यक वोटर फिर साथ आएंगे। यही मुकाबला अब चुनाव का असली ट्विस्ट बन गया है।
पिछले नतीजे क्या कहते हैं?
2021 विधानसभा चुनाव में इन 152 सीटों पर टीएमसी ने 92 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 59 सीटें मिली थीं। वहीं 2019 लोकसभा में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन 2024 में टीएमसी ने वापसी कर बढ़त बना ली। यानी यह क्षेत्र दोनों दलों के लिए “निर्णायक मैदान” बना हुआ है।
क्यों बढ़ी इतनी ज्यादा वोटिंग?
इस बार वोटिंग बढ़ने के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। वोटर लिस्ट में बदलाव, CAA-NRC जैसे मुद्दे और दोनों पार्टियों के बीच सीधी टक्कर ने माहौल गर्म रखा। इसके अलावा बूथ स्तर पर जबरदस्त लामबंदी ने भी लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित किया—जिसका नतीजा रिकॉर्ड मतदान के रूप में सामने आया।
क्या बदलाव का संकेत है यह लहर?
बंगाल का इतिहास बताता है कि ज्यादा वोटिंग कई बार सत्ता परिवर्तन का संकेत देती है। 2011 में सिर्फ 3% बढ़ी वोटिंग ने 34 साल पुरानी सरकार बदल दी थी। इस बार 10% की बढ़ोतरी कहीं बड़ा संकेत हो सकती है। अब सबकी नजर नतीजों पर है—जो तय करेंगे कि यह लहर Mamata Banerjee की वापसी बनेगी या भाजपा के लिए सत्ता का दरवाजा खोलेगी।
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