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भोपाल में मेट्रो कॉरिडोर के 500 मीटर दायरे को ‘रीसिविंग एरिया’ बनाने की तैयारी, विकास अधिकारों पर पड़ेगा असर

11 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में मेट्रो कॉरिडोर के 500 मीटर दायरे को ‘रीसिविंग एरिया’ बनाने की तैयारी, विकास अधिकारों पर पड़ेगा असर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल विकास योजना 2005 के तहत मेट्रो रेल परियोजना के दोनों तरफ 500-500 मीटर क्षेत्र को रीसिविंग एरिया घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रस्ताव पर शुक्रवार को टीएंडसीपी में सुनवाई होगी, जिसके बाद आपत्तियों के निराकरण के आधार पर इसी महीने मास्टर प्लान में संशोधन का नोटिफिकेशन जारी किया जाना प्रस्तावित है।


इस फैसले से मेट्रो स्टेशनों के आसपास निर्माण की क्षमता, व्यावसायिक गतिविधियों और संपत्तियों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। व्यवस्था मध्य प्रदेश हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) नियम, 2018 के तहत लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है।


सुरेंद्र तिवारी सहित आपत्तिकर्ता रखेंगे पक्ष

भोपाल सिटीजन फोरम के संयोजक सुरेंद्र तिवारी ने प्रस्ताव के संबंध में आपत्ति दर्ज कराई है। शुक्रवार की सुनवाई में वे और अन्य आपत्तिकर्ता अपनी बात रखेंगे। टीएंडसीपी के आयुक्त सह संचालक कौशलेंद्र विक्रमसिंह के मुताबिक, मेट्रो के आसपास 500 मीटर क्षेत्र को लेकर आपत्तियों की सुनवाई की जा रही है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया शहरी विकास से जुड़ी शासन की नीति के तहत आगे बढ़ रही है।


“शहरी विकास के लिए शासन की पॉलिसी है। उसके तहत ही प्रक्रिया की जा रही है।” — कौशलेंद्र विक्रमसिंह, आयुक्त सह संचालक, टीएंडसीपी


रीसिविंग एरिया बनने से क्या बदलेगा?

प्रस्ताव लागू होने पर मेट्रो कॉरिडोर के आसपास विकास गतिविधियों को अधिक घनत्व देने की व्यवस्था बनेगी। इसका प्रमुख उद्देश्य मेट्रो के आसपास आवासीय और व्यावसायिक विकास को बढ़ाना है। मौजूदा 1:25 एफएआर के मुकाबले अतिरिक्त विकास अधिकार खरीदने पर एफएआर तीन से पांच गुना तक बढ़ने की बात कही गई है। इससे अधिक मंजिलों वाली इमारतों के निर्माण की संभावना बढ़ेगी।


संभावित फायदे

  1. वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा और अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण संभव होगा।

  2. मेट्रो स्टेशन के 500 मीटर के दायरे में घनी आबादी और कमर्शियल हब विकसित होने से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ सकता है।

  3. निजी वाहनों का उपयोग घटने पर मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक दबाव कम होने की संभावना है।

  4. प्लॉट और संपत्तियों की रीसेल तथा व्यावसायिक वैल्यू बढ़ सकती है।

  5. स्थानीय भू-स्वामियों को संपत्ति के बढ़ते मूल्य से आर्थिक लाभ मिल सकता है।


बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ सकता है दबाव

घने और ऊंचे निर्माण के साथ मौजूदा शहरी सुविधाओं पर अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका भी जताई गई है। यदि सीवरेज, पेयजल, ड्रेनेज और बिजली व्यवस्था को पहले मजबूत नहीं किया गया, तो हाईराइज इमारतों के कारण समस्याएं बढ़ सकती हैं।


आंतरिक सड़कों और गलियों में वाहनों की संख्या बढ़ने तथा पार्किंग की कमी से स्थानीय स्तर पर जाम की स्थिति बनने की संभावना भी बताई गई है।


सामने आए संभावित नुकसान

सीवरेज, पानी, ड्रेनेज और बिजली नेटवर्क पर्याप्त रूप से अपग्रेड नहीं होने पर बुनियादी सुविधाओं पर संकट बढ़ सकता है। मेट्रो के इस्तेमाल के बावजूद 500 मीटर क्षेत्र की छोटी सड़कों पर वाहनों और पार्किंग की समस्या से जाम हो सकता है।


पुराने 1-2 मंजिला मकानों के पास बहुमंजिला इमारतें बनने से धूप, वेंटिलेशन और प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है।


अधिक निर्माण से हरियाली घटने और कंक्रीट हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ने की आशंका है।


जमीन और मकानों की कीमतें बढ़ने से मध्यम तथा निम्न-मध्यम वर्ग के लिए इन क्षेत्रों में रहना या कारोबार करना महंगा हो सकता है।


इसी महीने आ सकता है मास्टर प्लान संशोधन का नोटिफिकेशन

शुक्रवार की सुनवाई के बाद प्रस्ताव पर दर्ज आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा। इसके बाद इसी महीने रीसिविंग एरिया से संबंधित मास्टर प्लान में बदलाव का नोटिफिकेशन जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


यह पूरी व्यवस्था मध्य प्रदेश TDR नियम, 2018 के तहत मेट्रो के आसपास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है।

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