N
डेस्क रिपोर्टर
नई दिल्ली, न्यूज वर्ल्ड डेस्क। प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रमोशन में रिजर्वेशन देने से पहले राज्य सरकारों को आंकड़ों के जरिए ये साबित करना होगा कि एससी-एसटी का प्रतिनिधित्व कम है। बिना आंकड़े के नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वह नागराज बनाम भारत सरकार (2006) और जरनैल सिंह (2018) में संविधान पीठ के फैसले के बाद एक नया पैमाना नहीं बना सकता। कोर्ट ने फैसले में प्रमोशन में रिजर्वेशन के लिए निर्धारित शर्तों में भी बदलाव से इंकार किया है।
तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनाया फैसला
जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने प्रमोशन में आरक्षण पर अपना फैसला सुनाया। इस मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बलबीर सिंह और अन्य प्रमुख वकीलों ने कई राज्यों का प्रतिनिधित्व किया।
संक्षेप में फैसले के मुख्य बिंदु
- कोर्ट प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता का निर्धारण करने के लिए कोई पैमाना स्थापित नही कर सकता है।
- राजय को प्रतिनिधित्व की पर्याप्तता पर मात्रात्मक डेटा एकत्र करना आवश्यक है।
- आरक्षण के लिए मात्रात्मक डेटा एकत्र करने के लिए संवर्ग को इकाई प्रभारी होना चाहिए।
- 2006 के नागराज के फैसले का दीर्घकालिक प्रभाव होगा।
कुल मिलाकर यही है कि फिलहाल 2006 के नागराज फैसले और 2018 के जरनैल सिंह फैसले में रखी गई शर्तो को सुप्रीम कोर्ट ने ढीला नहीं किया है। केन्द्र और राज्यों से जुड़े आरक्षण के मामलों में अधिक स्पष्टता के लिए 24 फरवरी से सुनवाई शुरु होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण की शर्तो को कम करने से इन्कार कर दिया।
अक्टूबर 2021 में फैसला रखा था सुरक्षित
सरकारी नौकरियों में एससी-एसटी के अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2021 में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इससे पहले केन्द्र ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि यह जीवन की सच्चाई है कि आजादी के करीब 75 साल बाद भी एससी-एसटी के लोगों को अगड़ी जातियों के समान योग्यता के स्तर पर नहीं लाया गया।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

