
नई दिल्ली। बिलकिस बानो गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की रिहाई के आदेश को निरस्त कर दिया है।अब रिहा हुए दोषियों को फिर जेल जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को 2 हफ्ते में सरेंडर कर वापस जेल जाने का आदेश दिया है। ये फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की जल्द रिहाई की अनुमति देने वाले गुजरात सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का माफी आदेश खारिज कर दिया और कहा कि छूट पर फैसला महाराष्ट्र सरकार को लेना था, गुजरात सक्षम राज्य नहीं. दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया. कोर्ट ने कहा कि उसका अधिकार क्षेत्र गुजरात के पास है। SC का 2022 आदेश धोखाधड़ी से प्राप्त किया, जिस राज्य में ट्रायल चला, उसे छूट पर निर्णय लेने का अधिकार था। गुजरात छूट पर ये फैसला लेने में सक्षम नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, राज्य में जहां अपराधी पर ट्रायल चलाया जाता है और सजा सुनाई जाती है, वह दोषियों को माफी याचिका पर फैसला करने में सक्षम है. सक्षमता की कमी के कारण गुजरात सरकार द्वारा छूट के आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस नागरत्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, प्लेटो ने कहा था कि सजा प्रतिशोध के लिए नहीं बल्कि सुधार के लिए है।
क्यूरेटिव थ्योरी में सजा की तुलना दवा से की जाती है, अगर किसी अपराधी का इलाज संभव है, तो उसे मुक्त कर दिया जाना चाहिए।
यह सुधारात्मक सिद्धांत का आधार है। लेकिन पीड़ित के अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं।
नारी सम्मान की पात्र है। क्या महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों में छूट दी जा सकती है? ये वो मुद्दे हैं जो उठते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बिलकिस बानो केस में दोषियों की सजा में छूट को चुनौती देने याचिकाएं सुनवाई योग्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिकाओं की विचारणीयता के संबंध में जवाब देने से इनकार कर दिया क्योंकि बिलकिस बानो की याचिका को पहले ही सुनवाई योग्य माना जा चुका है।
बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि राज्य, जहां किसी अपराधी पर मुकदमा चलाया जाता है और सजा सुनाई जाती है,
वह दोषियों की माफी याचिका पर निर्णय लेने में सक्षम है।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि दोषियों की सजा माफी का आदेश पारित करने के लिए गुजरात राज्य सक्षम नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र सरकार सक्षम है।
बिलकिस बानो केस में सु्प्रीम कोर्ट ने माना कि गुजरात राज्य सरकार दोषियों की सजा में छूट आदेश पारित करने में सक्षम नहीं थी।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, केवल इस आधार पर (गुजरात सरकार में क्षमता की कमी है), रिट याचिकाओं को अनुमति दी जानी चाहिए और आदेशों को खारिज किया जाना चाहिए।
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