मंगलवार, 05 मई 2026
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कभी कांग्रेस नेताओं के लिए अछूत रही बीजेपी में अब पूर्व कांग्रेसियों की है लंबी जमात; इसलिए कांग्रेस के नेताओं का बीजेपी में हो रहा स्वागत

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कभी कांग्रेस नेताओं के लिए अछूत रही बीजेपी में अब पूर्व कांग्रेसियों की है लंबी जमात; इसलिए कांग्रेस के नेताओं का बीजेपी में हो रहा स्वागत

कभी कांग्रेस नेताओं के लिए अछूत रही बीजेपी में अब पूर्व कांग्रेसियों की है लंबी जमात; इसलिए कांग्रेस के नेताओं का बीजेपी में हो रहा स्वागत

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में करारी हार से पस्त हुई कांग्रेस पार्टी को अब भाजपा संभलने का कोई मौका न देते हुए लगातार झटके पर झटके दे रही है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से जहां कांग्रेस में भगदड़ मची है, वहीं भाजपा बाहें पसारकर कांग्रेस छोड़कर आने वाले नेताओं का स्वागत कर रही है। हर दूसरे दिन कांग्रेस का बड़ा नेता भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले रहा है। इन नेताओं में विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल है।


रोज भाजपा में शामिल हो रहे कांग्रेसी नेता 

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व नेताओं को एकजुट नहीं कर पा रही है। कभी कांग्रेस नेताओं के लिए अछूत रही बीजेपी में पूर्व कांग्रेसियों की लंबी जमात है। उत्तर से दक्षिण तक अभी रोज किसी न किसी राज्य से कांग्रेस नेता के बीजेपी में शामिल होने की खबर आ रही है।


अब चुनाव लड़ने नहीं जीतने के लिए मैदान में उतरती है भाजपा 

नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभालने के बाद चुनावी रणनीति बदल दी। अब भारतीय जनता पार्टी चुनाव लड़ने के लिए नहीं बल्कि जीतने के लिए मैदान में उतरती है। पार्टी के रणनीतिकार डेटा एनालिसिस में माहिर हो चुके हैं। कांग्रेस से आए नेताओं ने बीजेपी की नीतियों के प्रति समर्पण दिखाया तो मोदी-शाह उसे बड़े इनाम देने से नहीं चूकते। असम के सीएम हिमांता विस्वसरमा, अरुणाचलप्रदेश के सीएम पेमा खांडू, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, त्रिपुरा के सीएम डॉ. माणिक साहा, नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो, कांग्रेसी रह चुके हैं। मध्यप्रदेश में सरकार बनवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्रालय जैसे ताकतवर विभाग के मंत्री बनाए गए। ऐसे कई नेता है जो पहले कांग्रेस में थे, लेकिन आज भाजपा में वो एक बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे है।


कांग्रेस के नेताओं के पास सिर्फ दो ऑप्शन 

उधर कांग्रेस देश भर में सिर्फ तेलंगाना, हिमाचल और कर्नाटक में सरकार चला रही है। वहीं बीजेपी देशभर में 17 राज्यों की सत्ता संभाल रही है। कांग्रेस के पास नेताओं को राज्यसभा में भेजने के लिए सीमित ऑप्शन हैं। कांग्रेस के कई नेता अपनी भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं की तलाश में हैं। वर्त्तमान राजनीतिक हालात में कांग्रेस के नेताओं के पास दो ही विकल्प हैं। पहला धैर्य रखें और देश का मूड बदलने का इंतजार करें। दूसरा, किसी दूसरी पार्टी के साथ राजनीतिक पारी को आगे बढ़ाएं।


इसलिए कांग्रेस के नेताओं का हो रहा बीजेपी में स्वागत 

बात यदि 2019 के लोकसभा चुनाव कई करें तो इस दौरान कांग्रेस को सिर्फ 19.51 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बीजेपी ने 37.43 फीसदी वोट हासिल किए थे। हाल ही में 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर आए ओपिनियन पोल में भी बीजेपी के सत्ता में तीसरी बार वापसी का इशारा किया जा रहा है। इस बार भाजपा ने 50 प्रतिशत वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसका मतलब हर दूर वोट भाजपा के पक्ष में पड़े। इसके लिए जरूरी है कि विरोधियों को भी पार्टी के समर्थक के रूप में तब्दील किया जाए। इसलिए भाजपा के कांग्रेसीकरण की आलोचना के बाद भी नई बीजेपी में कांग्रेस नेताओं का स्वागत हो रहा है और उन्हें मलाईदार पद दिए जा रहे हैं।

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