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डेस्क रिपोर्टर
भोपाल, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। राजधानी में आयोजित हुए जनजातीय गौरव दिवस की शुरआत देश और मध्यप्रदेश की सियासत को नए संकेत दे रहा है। पीएम मोदी का सम्बोधन भी इस दिशा में इशारा कर रहा है। वर्षों से उपेक्षित आदिवासी समाज को सम्बल, सहयोग, और सम्मान दे कर बीजेपी और मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस समाज के साथ नजे इंसाफी अब नही चलेगी। मोदी के एक-एक शब्द इस बात की बानगी थे कि भविष्य में बीजेपी के साथ जनजातीय समाज के रिश्ते कैसे रहने वाले है।
मोदी के भाषण में भविष्य के संकेत
जनजातीय गौरव दिवस में मोदी और शिवराज का उद्बोधन साफ संकेत दे रहा है कि निकट भविष्य में बीजेपी किस स्वरूप में दिखेगी। ज़ाहिर सी बात है इसके सियासी मायने निकले ही जाएंगे। वह भी तब जब आने वाले तीन साल में 9 राज्यों सहित लोकसभा के चुनाव भी होंगे है। बीजेपी के सामने वह विपक्ष चुनोती पेश कर रहा है जो खुद अंदरखाने एक जुट होने की कवायद कर रहा है। ऐसे में मोदी ने आदिवासी योद्धाओं को याद कर उन्हें अनदेखा करने का आरोप कांग्रेस पर लगा कर देश में नई सियासत और समीकरण के संकेत दिए है।
आदिवासियों को हिंदुत्व से जोड़ा
उद्बोधन में पीएम मोदी ने कहा कि एक राजकुमार को आदिवासियों ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनाया है। इस बात से प्रदेश सहित उन सभी राज्यो के लिए आदिवासियों को हिंदुत्व से जोड़ने के रास्ते खोल दिए। जहां राम से जुड़े स्थान और आदिवासियों की आबादी भी है।
कहां कितने आदिवासी
मणिपुर में 41 प्रतिशत
छत्तीसगढ़ में 34 प्रतिशत
त्रिपुरा में 32 प्रतिशत
मध्यप्रदेश में 23 प्रतिशत
गुजरात मे 15 प्रतिशत
कांग्रेस के सामने खड़ी की चुनोती
स्वाभाविक तौर पर भगवान बिरसा मुंडा की जन्मतिथि पर जनजतीय नायकों के ज़िक्र के बहाने शहरों और गांवों की गलियों तक उन सभी पर ध्यान दिया जाएगा जिन्हें कांग्रेस शासन में सम्मान के नाम पर पेंशन ओर नाम मात्र की सुविधाएं दी गई। देश जानता है कि इसी समुदाय की बदौलत कांग्रेस ने लंबे समय तक देश में राज किया।
पांच राज्यों के चुनाव पर नज़र
मोदी आदिवासी गाँवो तक सड़क स्वास्थ शिक्षा और रोजगार की योजनाओं का ज़िक्र मंच से कर चुके है। उनके सवाल आरोप और अपनी सरकार के द्वारा किए गए प्रयासों का ज़िक्र बीजेपी के लिए विजय मंत्र से कम नही है। अगले वर्ष की शुरुआत में ही देश के प्रमुख राज्य उत्तरप्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड सहित पांच राज्यो में विधानसभा चुनाव है। हालांकि यहां आदिवासी मतदाता कम है, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान का मुद्दा कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा जरूर सकता है। वहीं बीजेपी मोदी मंत्र के सहारे आगामी राज्यो में सत्ता का रास्ता तय कर सकती है।
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