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BRICS में मोदी का बड़ा प्रस्ताव, 20 साल के एजेंडे और स्थायी व्यवस्था पर दिया जोर

12 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
BRICS में मोदी का बड़ा प्रस्ताव, 20 साल के एजेंडे और स्थायी व्यवस्था पर दिया जोर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS समिट में संगठन के भविष्य को लेकर कई अहम सुझाव दिए। उन्होंने अगले 20 वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडा बनाने और अध्यक्षता बदलने के बावजूद फैसलों पर काम जारी रखने की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा।


नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित BRICS देशों के नेता मौजूद रहे। मोदी ने कहा कि BRICS किसी देश के विरोध का मंच नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने का माध्यम है।


भारत की अध्यक्षता में 350 से ज्यादा बैठकें

मोदी ने BRICS समिट में सदस्य देशों के नेताओं का भारत में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान आम लोगों और मानवता को प्राथमिकता दी गई।


भारत ने अपनी अध्यक्षता में लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और टिकाऊ विकास को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा। BRICS की गतिविधियों को आम लोगों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।


इस अवधि में 350 से ज्यादा बैठकें हुईं। BRICS देशों की टीमों ने करीब 30 शहरों का दौरा किया और भारत ने उनका स्वागत किया।


हर साल अध्यक्ष बदलने पर भी काम न रुके

प्रधानमंत्री ने संगठन की कार्यप्रणाली में निरंतरता बनाए रखने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे पहले लिए गए फैसलों के क्रियान्वयन की रफ्तार प्रभावित नहीं होनी चाहिए।


इसके लिए मोदी ने एक स्थायी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया, जो फैसलों के अमल और उसकी निगरानी का काम कर सके।


डिजिटल रिकॉर्ड का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री ने एक सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की बात भी रखी। इसमें प्रत्येक निर्णय से जुड़ी अहम जानकारियां दर्ज करने का सुझाव दिया गया है:

  • फैसले की जिम्मेदारी किसकी है।

  • उसे पूरा करने की समयसीमा क्या है।

  • निर्णय पर अब तक कितना काम हुआ है।


इस व्यवस्था से अध्यक्षता बदलने के बाद भी पुराने निर्णयों पर प्रगति को ट्रैक किया जा सकेगा।


ग्लोबल साउथ की भूमिका पर मोदी का जोर

मोदी ने वैश्विक नियम तय करने की प्रक्रिया में सभी देशों की समान भागीदारी की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल दूसरे देशों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।


प्रधानमंत्री के अनुसार, ग्लोबल साउथ के देशों को नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।


नई तकनीकों के तेजी से विस्तार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इनके लिए नियम और मानक तय किए जाएंगे। इसलिए इन विषयों पर होने वाली वैश्विक चर्चाओं में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी जरूरी है।


BRICS को अगले 20 साल के लिए तैयार करने की अपील

मोदी ने BRICS की एकता और आपसी सहमति को ठोस परिणामों में बदलने की जरूरत बताई। उन्होंने संगठन के लिए अगले 20 वर्षों का नया और बड़ा एजेंडा तैयार करने की बात दोहराई। उनका जोर इस बात पर रहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच BRICS की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और परिणाम देने वाली हो।


संयुक्त बयान पर बनी सहमति

BRICS सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति बन गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और ईरान, सऊदी अरब तथा UAE जैसे सदस्य देशों के कुछ मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं।


इन मतभेदों के बीच भारत ने बातचीत के जरिए सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने और मतभेद कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


बंद कमरे में नेताओं की बैठक शुरू

BRICS सदस्य देशों के नेताओं की बंद कमरे में बैठक भी शुरू हो गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य सदस्य देशों के नेता शामिल हैं।

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